October 6, 2026

दो कमरों से शुरू हुआ सफर, आज सूकर पालन से 11 लाख रुपये का शुद्ध लाभ

रायपुर :  महज दो कमरों और सूकर पालन की एक यूनिट से शुरू हुआ स्वरोजगार का छोटा सा प्रयास आज एक सफल व्यवसाय का रूप ले चुका है। सरगुजा जिले के ग्राम शिवनाथपुर निवासी श्री अनिल कुमार खेस्स ने पशुधन विकास विभाग की सूकर प्रदाय योजना से मिले सहयोग, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। आज उनके फार्म में करीब 150 सूकर हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्होंने लगभग 14.5 से 15 लाख रुपये की बिक्री की, जिससे करीब 11 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

अनिल की सफलता की खास बात यह है कि उन्होंने व्यवसाय से होने वाली आमदनी को लगातार फार्म के विस्तार में लगाया। दो कमरों से शुरू हुए सूकर पालन व्यवसाय के लिए उन्होंने समय के साथ 10 अतिरिक्त कमरे तैयार किए और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से इसे आय का मजबूत जरिया बना लिया।

वर्ष 2018 में एक यूनिट से शुरू किया था सूकर पालन

अनिल बताते हैं कि वर्ष 2018 में पशुधन विकास विभाग की सूकर प्रदाय योजना के तहत उन्हें एक यूनिट प्राप्त हुई थी। उन्होंने दो कमरों में सूकर पालन की शुरुआत की। शुरुआती वर्षों में कई चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने व्यवसाय को जारी रखा और धीरे-धीरे इसके बेहतर प्रबंधन पर ध्यान दिया।

सूकर पालन से जो आय हुई, उसका एक हिस्सा उन्होंने व्यवसाय में ही दोबारा निवेश किया। इसी का परिणाम है कि छोटे स्तर से शुरू हुआ उनका फार्म लगातार विस्तार करता गया और आज यहां करीब 150 सूकर हैं।

आमदनी को बनाया निवेश, बढ़ता गया फार्म

व्यवसाय बढ़ने के साथ अनिल ने सूकरों के बेहतर रखरखाव के लिए व्यवस्थाओं का भी विस्तार किया। शुरुआती दो कमरों के बाद उन्होंने 10 अतिरिक्त कमरे बनाए। फार्म में प्रजनन के लिए अलग व्यवस्था की गई है। सूकर के बच्चों की वीनिंग के साथ कमजोर बच्चों की विशेष देखभाल भी की जाती है।

अनिल का अनुभव बताता है कि पशुपालन में केवल पशुओं की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बेहतर शेड प्रबंधन, संतुलित खान-पान, प्रजनन प्रबंधन, समय पर टीकाकरण और उपचार भी व्यवसाय की सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

विभागीय मार्गदर्शन ने दिखाई आगे बढ़ने की राह

पशुधन विकास विभाग के चिकित्सकों द्वारा अनिल को समय-समय पर सूकरों के खान-पान, शेड प्रबंधन, प्रजनन, टीकाकरण और उपचार के संबंध में मार्गदर्शन मिलता रहा। उन्होंने विशेषज्ञों की सलाह को अपने फार्म के संचालन में अपनाया और पशुओं की बेहतर देखभाल पर विशेष ध्यान दिया।

लगातार मेहनत और बेहतर प्रबंधन का परिणाम उनकी आय में भी दिखाई दिया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्होंने लगभग 14.5 से 15 लाख रुपये की बिक्री की, जिसमें करीब 11 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

सरकारी सहयोग से स्वरोजगार की मजबूत राह

अनिल कुमार खेस्स की कहानी बताती है कि सरकारी योजना से मिले शुरुआती सहयोग को मेहनत, सही प्रबंधन और विशेषज्ञ मार्गदर्शन से जोड़कर पशुपालन को लाभकारी स्वरोजगार में बदला जा सकता है। उन्होंने छोटे स्तर पर मिले अवसर को आगे बढ़ाया और व्यवसाय से होने वाली आय को पुनः निवेश कर अपने फार्म का लगातार विस्तार किया।

अनिल कुमार खेस्स पशुधन विकास विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि योजना से मिले सहयोग और विभागीय चिकित्सकों के मार्गदर्शन ने उन्हें व्यवसाय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता दी। उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्र के अन्य पशुपालकों के लिए भी प्रेरक उदाहरण है कि उपलब्ध संसाधनों और शासकीय योजनाओं का बेहतर उपयोग कर पशुपालन के माध्यम से आत्मनिर्भरता और बेहतर आय की राह बनाई जा सकती है।