गोंडी कलाकारों के लिए बड़ी सौगात, अमेज़न ई-कारीगर से मिलेगा नया बाजार

डिंडौरी: मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले की विश्व प्रसिद्ध 'गोंडी चित्रकला' (Gondi Art) को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। इस अनूठी पहल के तहत जिले के गौरव और गोंडी कला के गढ़ माने जाने वाले पाटनगढ़ गांव के कलाकारों को सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य इस पारंपरिक जनजातीय कला को वैश्विक पहचान दिलाना और बिचौलियों को हटाकर कलाकारों को उनकी मेहनत का सीधा मुनाफा दिलाना है।

अमेज़न 'ई-कारीगर' मंच से जुड़ेंगे कलाकार, सीधे विदेशों में बिकेंगी पेंटिंग्स

डिंडौरी कलेक्ट्रेट कार्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में गोंडी कलाकारों ने अपनी शानदार कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई।

  • कलेक्टर ने बढ़ाया हौसला: जिला कलेक्टर अंजू भदौरिया ने प्रदर्शनी का बारीकी से अवलोकन किया और कलाकारों से उनकी कला, बारीकियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर लंबी चर्चा की। कलाकारों का उत्साह बढ़ाने के लिए कलेक्टर ने मौके पर ही कई पेंटिंग्स खुद खरीदीं।

  • त्रिपक्षीय एमओयू (MoU) साइन: जिला प्रशासन की देखरेख में गोंडी पेंटिंग कलाकारों, आजीविका ग्राम संगठन और 'डॉट्स एंड ड्रीम्स' संस्था के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। इसके तहत कलाकारों को डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन सेलिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही इन्हें वैश्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'अमेज़न ई-कारीगर' से जोड़ा जा रहा है, जिससे अब दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति एक क्लिक पर इन पेंटिंग्स को खरीद सकेगा।

गोंडी चित्रकला का मक्का है पाटनगढ़ गांव

डिंडौरी का पाटनगढ़ गांव कोई साधारण गांव नहीं है, इसे गोंडी कला की जन्मस्थली का गौरव प्राप्त है:

पाटनगढ़ गांव के आंकड़े कला का वर्तमान स्वरूप
संबद्ध परिवार वर्तमान में करीब 157 आदिवासी परिवार सीधे तौर पर इस कला से जुड़े हैं।
आजीविका का साधन पीढ़ियों से चली आ रही यह पेंटिंग ही इन परिवारों की आय का मुख्य जरिया है।
सांस्कृतिक धरोहर यह पहल कला को जीवित रखने, उसके संरक्षण और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगी।

डिजिटल होने से दूर होगी गरीबी, बढ़ेगी कलाकारों की आय

कलेक्टर अंजू भदौरिया ने इस मौके पर कहा कि डिंडौरी की गोंडी कला पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। यह जिले की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे पाटनगढ़ के शिल्पकारों ने सदियों से सहेज कर रखा है। जिला प्रशासन का पूरा प्रयास है कि इन हुनरमंदों को ग्लोबल मार्केट उपलब्ध कराया जाए ताकि उन्हें उनकी कला का उचित मूल्य और पूरा आर्थिक सम्मान मिल सके।

प्रशासन के इस हाईटेक फैसले से पाटनगढ़ के कलाकारों में भारी उत्साह का माहौल है। कलाकारों का साफ कहना है कि डिजिटल दुनिया और बड़े ऑनलाइन बाजारों से जुड़ने के बाद उनकी कला को एक नया जीवन मिलेगा और उनके बच्चों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।