भोपाल। राजधानी में सफाई कर्मचारियों और नगर निगम के अन्य विभागों के कार्मिकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार दूसरे दिन भी जारी रहने से शहर की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। शहर के गली-मोहल्लों, सड़कों और बाजारों में कचरे के बड़े-बड़े ढेर जमा होने लगे हैं। कई स्थानों पर डस्टबिन पूरी तरह भर चुके हैं और कचरा सड़कों पर बिखर रहा है। इस हड़ताल का दायरा केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जलप्रदाय, फायर ब्रिगेड और अन्य महत्वपूर्ण महकमों के कर्मचारी भी काम पर नहीं लौटे हैं, जिससे जलापूर्ति पर भी गहरा संकट मंडराने लगा है।
मुख्यमंत्री से सीधी मुलाकात पर अड़े कर्मचारी
अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन (7262) के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के अनुसार, अकेले भोपाल में लगभग 7 हजार सफाईकर्मी हड़ताल पर हैं। इनके साथ ही 6 हजार कंप्यूटर ऑपरेटर, लिपिक, जलप्रदाय, अग्निशमन, भवन अनुमति, अतिक्रमण, विद्युत, उद्यान और योजना शाखा के कर्मचारी भी इस आंदोलन में शामिल हो गए हैं। कर्मचारी नेताओं ने दो टूक कह दिया है कि अब केवल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सीधी चर्चा होने के बाद ही आगामी रणनीति पर कोई निर्णय लिया जाएगा।
चार सौ से अधिक गाड़ियां खड़ी, ठप हुआ कचरा परिवहन
हड़ताल के चलते भोपाल में कचरा संग्रहण का कार्य पूरी तरह ठप पड़ गया है। शहरभर से कूड़ा उठाने के लिए तैनात 400 से ज्यादा गाड़ियां वर्तमान में विभिन्न गार्बेज स्टेशनों पर ही खड़ी हैं। सामान्य दिनों में प्रत्येक वाहन रोजाना दो से तीन फेरे लगाता है। शहर के 17 प्रमुख गार्बेज स्टेशनों पर कचरा एकत्र करके उसे कैप्सूल टैंकरों के माध्यम से आदमपुर छावनी भेजा जाता है। शहर से रोजाना लगभग 850 टन कचरा निकलता है, ऐसे में दो दिन से गाड़ियां नहीं चलने से रिहायशी बस्तियों और बाजारों में हालात गंभीर होने लगे हैं।
पेयजल संकट की आशंका और अटल भवन में तालाबंदी
कर्मचारियों की इस हड़ताल के कारण जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है क्योंकि भोपाल में 2.30 लाख से अधिक नल कनेक्शन हैं। इसके अलावा नगर निगम मुख्यालय स्थित 'अटल भवन' में भी कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। गुरुवार को कर्मचारी नेता अशोक वर्मा ने निगम मुख्यालय की बिजली काटते हुए वहां ताला लगा दिया था, जिसका असर सभी 85 वार्डों और 21 जोनों के कामकाज पर पड़ रहा है।
शिवपुरी और विदिशा समेत कई जिलों में भी असर
इस हड़ताल की आंच केवल भोपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि शिवपुरी और विदिशा सहित मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसका असर साफ दिख रहा है। शिवपुरी नगर पालिका के करीब 350 कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिससे वहां भी सड़कों पर कचरा जमा होने लगा है। संविदा व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने, वेतन वृद्धि और ठेका प्रथा समाप्त करने जैसी प्रमुख मांगों को लेकर प्रदेशभर में एक लाख से अधिक कर्मी प्रदर्शन कर रहे हैं।

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