November 5, 2026

दिवाली पर हार्ट अटैक का जोखिम क्यों बढ़ता है? जानें किन लोगों को रहना चाहिए सतर्क

नई दिल्ली। दीवाली का पावन पर्व जहाँ एक ओर घर-घर में खुशियों, दीपों और पारंपरिक मिठाइयों की रौनक लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर त्योहारों की भागदौड़, अत्यधिक व्यस्तता और खानपान में बरती गई जरा सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, विशेष रूप से हृदय रोगियों और उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए इस festive season के दौरान अपनी सेहत को लेकर अत्यधिक सावधानी बरतना बेहद आवश्यक होता है। अक्सर लोग सीने में हल्का दर्द, सांस फूलने की समस्या या अचानक आने वाले ठंडे पसीने जैसी गंभीर शारीरिक अस्वस्थता को सामान्य थकान या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में अत्यंत घातक साबित हो सकता है।

त्योहारों के दौरान हृदय संबंधी जोखिम बढ़ने के प्रमुख कारण

दिवाली के इन दिनों में लोगों की दैनिक जीवनशैली और खानपान की आदतों में अचानक बड़े बदलाव आ जाते हैं। देर रात तक जागना, खानपान का समय और संतुलन बिगड़ना, शारीरिक गतिविधियों का लगभग ठप हो जाना और उत्सव की तैयारियों का मानसिक तनाव दिल की सेहत पर सीधा असर डालता है। इसके अतिरिक्त, आतिशबाजी यानी पटाखों के कारण आसमान में फैलने वाला घना धुआं और गंभीर वायु प्रदूषण भी हृदय रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए स्थिति को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना देता है। त्योहारों के दौरान अत्यधिक तला-भुना और अधिक फैट वाला भोजन करना, जरूरत से ज्यादा मिठाइयों का सेवन करना, तथा भोजन में अत्यधिक मात्रा में नमक का प्रयोग करना रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बिगाड़ सकता है। इसके साथ ही, पर्याप्त नींद न मिलना और लगातार बना रहने वाला तनाव भी रक्त वाहिकाओं और हृदय गति को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है।

किन लोगों को रहता है हार्ट अटैक का सबसे ज्यादा खतरा?

चिकित्सकीय दृष्टिकोण से कुछ विशेष वर्ग के लोगों को इस अवधि में अपने स्वास्थ्य के प्रति सर्वाधिक सचेत रहने की आवश्यकता होती है। जो लोग पहले से ही हृदय रोग से पीड़ित हैं, जिनकी एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी हो चुकी है, या जिनके हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज है, उन्हें अपनी निर्धारित दवाइयों का सेवन बिना किसी फेरबदल के नियमित रूप से जारी रखना चाहिए। इसके अलावा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से ग्रसित मरीजों को भी इस दौरान अपने रक्तचाप तथा ब्लड शुगर के स्तर की निरंतर निगरानी करते रहना चाहिए, क्योंकि मीठे और नमकीन व्यंजनों की अधिकता इन समस्याओं को अचानक गंभीर बना सकती है। उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर से पीड़ित व्यक्तियों को तली-भुनी और वसायुक्त चीजों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए, जबकि मोटापे से जूझ रहे लोगों को भी अपने वजन और खानपान पर विशेष नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही, धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों के लिए पटाखों के धुएं और प्रदूषित हवा का संपर्क हृदय के लिए और अधिक नुकसानदेह साबित हो सकता है।

हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज

किसी भी आपात स्थिति से बचने के लिए शरीर द्वारा दिए जाने वाले संकेतों को समय पर पहचानना अति आवश्यक है। सीने के बीचों-बीच तेज दर्द, असहनीय दबाव या जकड़न महसूस होना, और इस दर्द का धीरे-धीरे बाएं हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैल जाना हृदयघात का प्रमुख लक्षण हो सकता है। इसके अलावा, बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक सांस फूलने लगना, शरीर से अचानक ठंडा पसीना छूटना, चक्कर आना या बेहोशी की स्थिति बनना, तथा अत्यधिक कमजोरी व थकान महसूस होना भी गंभीर चेतावनी संकेत हैं। यदि किसी भी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दें और हार्ट अटैक का संदेह हो, तो तुरंत आपातकालीन एंबुलेंस सेवा (भारत में 112 या 108) पर संपर्क करना चाहिए। ऐसी स्थिति में कभी भी खुद वाहन चलाकर अस्पताल जाने का प्रयास न करें और लक्षणों के स्वतः ठीक होने का इंतजार करने की भूल बिल्कुल न करें।