बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी आधुनिक तकनीक के घोर दुरुपयोग का एक बेहद शर्मनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ एक स्कूल वाहन चालक ने कक्षा आठ की एक मासूम छात्रा की मॉर्फ्ड अश्लील तस्वीर तैयार कर उसे सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित कर दिया था। इस गंभीर मामले में त्वरित न्याय की मिसाल पेश करते हुए विशेष पॉक्सो न्यायालय के न्यायाधीश प्रथमकांत की अदालत ने दोषी आरोपी को कठोरतम सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए पच्चीस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा के साथ-साथ पचपन हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। न्यायालय के इस सख्त फैसले से अपराधियों में हड़कंप मच गया है।
एआई तकनीक का दुरुपयोग और घटना की पृष्ठभूमि
अभियोजन पक्ष से प्राप्त विवरण के अनुसार, भीमपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले देवलवीर गाँव निवासी संजीत कुमार स्कूल के बच्चों को लाने-ले जाने के लिए अनुबंधित वाहन चलाने का कार्य करता था। पीड़ित कक्षा आठ की छात्रा भी रोजाना उसी स्कूल वाहन से पढ़ाई करने आती-जाती थी। वाहन चालक ने इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए एआई तकनीक का इस्तेमाल करके छात्रा की एक आपत्तिजनक और अश्लील तस्वीर तैयार कर ली। आरोपी ने न केवल उस फर्जी तस्वीर को व्हाट्सएप के जरिए पीड़िता के पास भेजा, बल्कि उसे अपने अन्य दोस्तों के बीच भी वायरल कर दिया, जिससे पीड़िता और उसके परिवार को भारी मानसिक प्रताड़ना व अपमान का सामना करना पड़ा।
पुलिस में शिकायत, त्वरित विवेचना और मजबूत पैरवी
इस घिनौने कृत्य से आहत होकर छात्रा के पिता ने गत सात मई 2025 को भीमपुरा थाने में पहुँचकर आरोपी के विरुद्ध नामजद तहरीर दी थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पॉक्सो अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत गंभीर अपराध पंजीबद्ध किया और त्वरित विवेचना पूरी कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा के कुशल निर्देशन में गठित मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग द्वारा अदालत में की गई सशक्त और प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान के तहत यह ऐतिहासिक सजा सुनिश्चित हो सकी है।
न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला और अर्थदंड का प्रावधान
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट संख्या-08 प्रथमकांत की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध अकाट्य साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद आरोपी संजीत कुमार को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत पूरी तरह दोषी पाया। अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए उसे पच्चीस वर्ष के कठोर सश्रम कारावास और पचास हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अर्थदंड की राशि अदा न करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। इस प्रकार न्यायपालिका के इस सख्त आदेश ने महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध साइबर अपराध करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश दिया है।

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