November 2, 2026

70 किमी का सफर और पांच थाने, फिर भी नहीं बच सकी अधिवक्ता की जान; जांच पर सवाल

जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले अंतर्गत कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार (68) के सनसनीखेज अपहरण और निर्मम हत्याकांड मामले में पुलिस प्रशासन की शुरुआती ढिलाई और सुस्त कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जमीन के विवाद में रंजिश के तहत शनिवार शाम कार सवार बदमाशों ने बार अध्यक्ष का अपहरण कर लिया और करीब 70 किलोमीटर दूर ले जाकर धारदार हथियार से उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। रविवार सुबह कानपुर नगर के गुजैनी थाना क्षेत्र स्थित नहर से पुलिस ने उनका रक्तरंजित शव बरामद किया। इस खूनी वारदात में शामिल आरोपियों ने जालौन, कानपुर देहात और कानपुर नगर जैसे तीन जिलों के पांच थानों की सीमाओं को बड़ी आसानी से पार कर लिया, लेकिन किसी भी नाके या पुलिस पोस्ट पर संदिग्ध वाहन को रोका नहीं जा सका।

तीन जिलों की पुलिस को चकमा देकर 70 किलोमीटर दूर पहुंचे हत्यारे

घटनाक्रम के अनुसार, शनिवार शाम करीब पांच बजे अधिवक्ता गयादीन अहिरवार के बेटे हर्ष ने अन्य वकीलों और कालपी कोतवाली पुलिस को सूचना दी थी कि एक बिना नंबर की संदिग्ध कार में सवार लोग उनके पिता को जबरन अपने साथ ले गए हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस की शुरुआती छानबीन केवल कालपी और आसपास के स्थानीय क्षेत्रों तक ही सीमित रही। इस दौरान आरोपी कालपी, भोगनीपुर, रनियां, सचेंडी और गुजैनी थानों की सीमा से बेखौफ गुजरते हुए कानपुर तक पहुंच गए। इस बड़ी चूक ने पुलिस की आपातकालीन घेराबंदी, सघन चेकिंग अभियान और अंतरजिला सूचना तंत्र की प्रभावशीलता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

जमीन विवाद में मिली थी सुपारी, एनकाउंटर के बाद तीन आरोपी गिरफ्तार

मामले का खुलासा करते हुए अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) डॉ. ईशान सोनी ने बताया कि गयादीन अहिरवार का कानपुर निवासी इंद्रजीत यादव से लंबे समय से जमीन को लेकर दीवानी मुकदमा चल रहा था। इसी रंजिश के चलते इंद्रजीत ने मुख्य साजिशकर्ता मोनू यादव को हत्या की सुपारी दी थी। पुलिस टीम जब पकड़े गए आरोपियों की निशानदेही पर प्रयुक्त कार और असलहा बरामद करने कालपी के जंगलों में पहुंची, तो आरोपियों ने छिपाये गए हथियारों से पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पैर में गोली लगने से आशीष विश्वकर्मा और सर्वेश शुक्ला घायल हो गए, जबकि उनके तीसरे साथी केशव को भी दबोच लिया गया। पुलिस मुख्य आरोपी मोनू यादव की सरगर्मी से तलाश कर रही है।

शहर में बढ़ा तनाव, सुरक्षा व्यवस्था सख्त और परिवार पर दुखों का पहाड़

चार बार बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए सर्वप्रिय अधिवक्ता गयादीन अहिरवार की हत्या की खबर फैलते ही वकीलों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश फैल गया। कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए कालपी को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और कई थानों की पुलिस बल के साथ क्षेत्राधिकारी (सीओ) स्तर के अधिकारी मौके पर मुस्तैद हैं। गौरतलब है कि पीड़ित परिवार पर एक वर्ष के भीतर यह दूसरी बड़ी त्रासदी है; 31 अक्तूबर 2025 को उनके पुत्र गौरव की असमय मौत हो गई थी। परिजनों ने यह भी खुलासा किया कि 13 जून 2026 को भी गयादीन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसकी शिकायत उन्होंने थाने से लेकर पुलिस अधीक्षक तक की थी, परंतु समय रहते कोई ठोस सुरक्षात्मक कार्रवाई नहीं की गई।