नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की हालिया महारैली को लेकर उपजे राजनीतिक घमासान के बीच कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सांसद जयराम रमेश ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि भाजपा ने इस महारैली को विफल करने और बाहर से आने वाले लोगों को दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने से रोकने के लिए जानबूझकर यह झूठा भय फैलाया था कि रैली के कारण स्थानीय व्यापारियों को भारी नुकसान होगा और दिल्ली के बाजार पूरी तरह बंद रहेंगे। हालांकि, उनके दावे के अनुसार भाजपा का यह कुचक्र और दुष्प्रचार पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ, और इसके विपरीत दिल्ली के तमाम छोटे-बड़े कारोबारियों को इस बड़े आयोजन से सीधा आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ।
भाजपा पर वोट चोरी और मुद्दों से भटकाने का गंभीर आरोप
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि भाजपा का मुख्य एजेंडा हमेशा से जनता का ध्यान असल और बुनियादी मुद्दों से भटकाना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दुष्प्रचार का असली मकसद वोट चोरी, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की जवाबदेही जैसे गंभीर विषयों से नागरिकों का ध्यान हटाना तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाना था। इसके साथ ही इसका उद्देश्य देश के कोने-कोने से आने वाले आम लोगों को महारैली में शामिल होने से हतोत्साहित करना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि दिल्ली की जागरूक जनता और देश भर से पधारे आगंतुकों ने इस भ्रामक राजनीति का मुँहतोड़ जवाब दिया है।
व्यापारिक नुकसान के दावों को नकारा और बाजारों में रही चहल-पहल
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के उस दावे के विपरीत जिसमें रैली के कारण 10 से 11 हजार करोड़ रुपये के नुकसान की बात कही गई थी, जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि धरातल पर स्थिति बिल्कुल इसके उलट थी। राहुल गांधी के आह्वान पर रैली में आए लोगों ने दिल्ली के ऐतिहासिक बाजारों में खुलकर खरीदारी की। पुरानी दिल्ली के प्रमुख थोक बाजारों से लेकर खुदरा दुकानों तक में ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ी और जमकर व्यापार हुआ। रेहड़ी-पटरी वाले छोटे दुकानदारों और पटरी विक्रेताओं से भी लोगों ने बड़े पैमाने पर सामान खरीदा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिली।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और त्योहारों के सीजन पर बहस
उल्लेखनीय है कि इस रैली को लेकर राजनीतिक दलों के अपने-अपने दावे रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही इस बात पर सवाल उठाया था कि त्योहारों के इस संवेदनशील सीजन में रैली आयोजित करने से व्यापारियों के साल भर के सबसे बड़े कारोबारी सप्ताह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, क्योंकि व्यापारियों ने तारीख बदलने के लिए कई बार अपील की थी। इसके जवाब में कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि जनता अब इन राजनीतिक दांवपेंचों को भली-भांति समझ चुकी है और वह लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ अपने कारोबार को भी बखूबी चलाना जानती है।

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