कराची। पाकिस्तान ने एक बार फिर चीन के प्रति अपनी निष्ठा प्रदर्शित करते हुए ताइवान की एयरलाइंस के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। चीन की ‘वन चाइना पॉलिसी’ के समर्थन में उठाए गए इस कदम के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की आलोचना हो रही है। इसके विपरीत, भारत ने इस मामले पर अपनी स्वतंत्र और दृढ़ विदेश नीति का परिचय देते हुए ताइवान के प्रति सकारात्मक रुख अपनाया है।
ताइवान की उड़ानों के लिए पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद
पाकिस्तान ने ताइवान की प्रमुख विमानन कंपनियों को अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है, जिसके चलते यूरोप जाने वाली उनकी उड़ानों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि देश का विमानन विभाग 'वन चाइना पॉलिसी' का पालन करता है और केवल चीन की मुख्य भूमि की एयरलाइंस को ही पाकिस्तान के ऊपर से उड़ान भरने की अनुमति है।
तय नियमों के तहत ताइवान की विमान कंपनियों ने 25 अक्टूबर से ही पाकिस्तानी एयरस्पेस का उपयोग बंद कर दिया है। अब एशिया और यूरोप के बीच संचालित उनकी दर्जन भर से अधिक उड़ानें रूस के ऊपर से होकर गुजर रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का यह निर्णय चीन से आर्थिक सहायता, सैन्य सहयोग और राजनीतिक समर्थन हासिल करने के उद्देश्य से लिया गया है।
भारत ने प्रदर्शित की स्वतंत्र विदेश नीति
इस घटनाक्रम के बीच भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर एक मजबूत और स्वतंत्र रुख दिखाया है। जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से भारत और ताइवान के बीच सीधी विमान सेवा शुरू होने की संभावना पर सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि दोनों पक्षों के बीच सीधी उड़ानें संभव होंगी, तो वे निश्चित रूप से संचालित की जाएंगी।
भारत सरकार के इस स्पष्ट बयान ने यह संदेश दे दिया है कि देश किसी अन्य राष्ट्र के दबाव में काम करने के बजाय अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के अनुसार निर्णय लेता है। जहां एक ओर पाकिस्तान ने चीन के समक्ष समर्पण कर अपनी आश्रित छवि को उजागर किया है, वहीं दूसरी ओर भारत ने कूटनीतिक स्वाभिमान और संप्रभुता का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है।

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