October 25, 2026

सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में बुलडोजर कार्रवाई, 6 हजार वर्गफीट का निर्माण जमींदोज

उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने जा रहे भव्य सिंहस्थ महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां व्यापक रूप से शुरू हो चुकी हैं। इसी सिलसिले में उज्जैन नगर निगम के अतिक्रमण विरोधी दस्ते ने सिंहस्थ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अवैध कब्जों और बिना अनुमति के किए जा रहे निर्माणों के खिलाफ अपने अभियान को और अधिक तेज कर दिया है। रविवार की सुबह-सुबह प्रशासनिक टीम ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए खास चौक इलाके में कई हजार वर्गफीट में बन रहे एक बहुत बड़े गैर-कानूनी ढांचे को ध्वस्त कर दिया।

हनुमान मंदिर के पास अवैध रूप से बनाई जा रही थी होटल और दुकानें

यह कार्रवाई खास चौक क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध 11 मुखी हनुमान मंदिर के समीप की गई। संबंधित स्थल पर बिना किसी आधिकारिक स्वीकृति और नगर निवेश विभाग की अनुमति के लगभग छह हजार वर्गफीट के विशाल भूखंड पर निर्माण कार्य कराया जा रहा था। इस स्थान पर व्यावसायिक उपयोग के उद्देश्य से एक विशाल होटल और उसके सामने दुकानों का निर्माण करने की योजना थी। जैसे ही नगर निगम का अमला दलबल के साथ मौके पर पहुंचा, वहां हलचल तेज हो गई और देखते ही देखते अवैध ढांचे को ध्वस्त करने का काम शुरू कर दिया गया।

भारी पुलिस बल और बुलडोजर के साथ अंजाम दी गई कार्रवाई

इस बड़े अभियान को पूरा करने के लिए नगर निगम की टीम संपूर्ण तैयारियों और सुरक्षा उपायों के साथ घटनास्थल पर पहुंची थी। किसी भी संभावित विरोध अथवा हंगामे की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। कार्रवाई के दौरान दो बड़ी पोकलेन मशीनों और तीन जेसीबी की सहायता ली गई, जिनकी मदद से भूतल और पहली मंजिल पर बने इस पूरे ढांचे को कुछ ही समय में पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया।

अवैध निर्माण को लेकर दिए गए थे कानूनी नोटिस

नगर निगम के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सिंहस्थ क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा अथवा बिना अनुमति निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित निर्माणकर्ता को पूर्व में ही कानूनी नोटिस जारी किए जा चुके थे। पहला नोटिस जारी करने के बाद अंतिम चेतावनी भी दी गई थी, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि निर्माण न हटाने पर निगम स्वयं कार्रवाई करेगा और इसमें होने वाला व्यय भी संबंधित पक्ष से वसूला जाएगा। तय सीमा बीत जाने के बाद भी निर्माण न रोके जाने पर यह दंडात्मक कदम उठाया गया। प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ की जमीनों को सुरक्षित रखने के लिए आगे भी इस प्रकार की सख्त कार्रवाइयां जारी रहेंगी।