October 23, 2026

अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों के लिए नियमों में बदलाव, भारतीयों पर निशाना साधने से रूबियो का इनकार

वाशिंगटन। अमेरिका में आजीविका और करियर की संभावनाएं तलाश रहे भारतीय पेशेवरों तथा वहां कार्यरत भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के लिए अमेरिका के नए वीजा नियम बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं। अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में विदेशी कर्मियों से जुड़े प्रावधानों को अधिक कड़ा कर दिया है तथा कई दिग्गज आईटी संस्थाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। हाल ही में भारत यात्रा पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि नियमों में इस बदलाव का उद्देश्य किसी विशेष देश या भारतीय पेशेवरों को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि अपनी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और स्थानीय कर्मचारियों के हितों को सर्वोपरि रखना है।

वीजा नियमों में कड़ाई और आईटी कंपनियों पर कार्रवाई

अमेरिका के श्रम विभाग ने स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (पीईआरएम) के तहत कई प्रमुख वैश्विक और भारतीय आईटी कंपनियों को निलंबित कर दिया है। इनमें इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, विप्रो, एचसीएल, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी जैसी अग्रणी कंपनियों के साथ-साथ माइक्रोसॉफ्ट और एडोब जैसी अमेरिकी कंपनियां भी शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि आव्रजन प्रणाली में लंबे समय से चली आ रही खामियों और धोखाधड़ी के मामलों को रोकने के लिए कई स्तरों पर जांच जारी है। स्थायी श्रम प्रमाणन और एच-1बी वीजा प्रक्रिया में सख्ती आने से भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों और उन्हें रोजगार देने वाली कंपनियों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

विदेशी छात्रों हेतु ओपीटी व्यवस्था और फीस का प्रस्ताव

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने एफ-1 स्टूडेंट वीजा पर अध्ययन करने वाले अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के लिए भी नए नियम प्रस्तावित किए हैं। इसके अंतर्गत वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्रों पर नया शुल्क लगाया जा सकता है, जिससे शिक्षा के बाद अमेरिका में कार्य अनुभव प्राप्त करने वाले छात्रों की वित्तीय स्थिति प्रभावित होगी। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय स्थानीय रोजगार बाजार को संतुलित करने और संपूर्ण वीजा प्रणाली को अधिक पारदर्शी तथा सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से लिया जा रहा है।

भारत का रुख और अमेरिकी प्रशासन की नीति

अमेरिकी विदेश मंत्री ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीति को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रत्येक राष्ट्र की भांति अमेरिका भी अपने नागरिकों और कार्यबल के हितों को प्राथमिकता देगा। दूसरी ओर, भारत सरकार का मानना है कि कुशल पेशेवरों की वैश्विक आवाजाही दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं, शोध तथा नवाचार के लिए परस्पर लाभदायक है। भारत ने यह स्पष्ट किया है कि ऐसे कठोर प्रतिबंधात्मक कदम दोनों देशों के बीच साझा आर्थिक और तकनीकी सहयोग के दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुकूल नहीं हैं।