October 22, 2026

क्या दक्षिण भारत में बदल रहे हैं राजनीतिक समीकरण? नायडू-विजय की मुलाकात से उठे सवाल

चेन्नई। लोकसभा चुनाव 2029 को लेकर दक्षिण भारत की राजनीति में नए समीकरण बनने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राष्ट्रीय दलों के साथ-साथ क्षेत्रीय दल भी अपनी रणनीति को धार देने में जुट गए हैं। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के प्रमुख क्षेत्रीय क्षत्रपों की गतिविधियों ने आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाले बड़े बदलावों के संकेत देने शुरू कर दिए हैं।

विजयवाड़ा उत्सव में नायडू और विजय की मुलाकात

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय हाल ही में 'विजयवाड़ा उत्सव 2.0' में शामिल होने पहुंचे थे, जहां आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात के गहरे मायने निकाले जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इसके जरिए दक्षिण के नेता भविष्य के विकल्पों को खुला रख रहे हैं। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि इस कदम से एनडीए गठबंधन को यह संदेश देने की कोशिश हो सकती है कि जरूरत पड़ने पर क्षेत्रीय दल अपनी शर्तों पर काम कर सकते हैं। हालांकि, टीडीपी नेताओं का साफ कहना है कि इस बैठक का मकसद राजनीति से ऊपर उठकर नदियों को जोड़ने जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर चर्चा करना था, जिससे दोनों राज्यों को फायदा मिल सके।

जगन मोहन रेड्डी के रुख से बदली सियासी हवा

दूसरी तरफ, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआरसीपी प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के हालिया बयानों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े अधिनियम को पारित कराने में अपनी पिछली भूमिका पर खेद जताते हुए इसे एक भूल बताया है। उनके इस रुख में आए बदलाव के बाद से विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के भीतर यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि 2029 के चुनाव से पहले दक्षिण में सियासी पाले बदल सकते हैं।

तमिलनाडु में डीएमके की तलाश और तीसरा मोर्चा

तमिलनाडु की राजनीति में भी उठापटक जारी है। राज्य के चुनावों के बाद राजनीतिक घटनाक्रम में आए बदलावों के बीच डीएमके फिलहाल फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। एक तरफ जहां महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दों पर भाजपा से संपर्क की चर्चाएं हैं, वहीं पार्टी किसी भी तरह के जल्दबाजी वाले फैसले से बच रही है। इसी कड़ी में डीएमके नेता कनिमोझी ने एनसीपी (शरद पवार) और तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की है। इसके अलावा, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर डीएमके ने राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के साथ अपने वैचारिक तालमेल के संकेत भी दिए हैं।