October 19, 2026

किसी की पत्नी तो किसी का बेटा लड़ेगा चुनाव, पंचायत चुनाव में नेताओं ने अपनाया खास दांव

जयपुर। राजस्थान में स्थानीय निकाय और ग्रामीण सरकार के चुनावों का माहौल इन दिनों अपने चरम पर है, जहाँ सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के दिग्गज नेताओं ने अपनी राजनीतिक जमीन को और अधिक मजबूत करने के लिए अपने परिवार के सदस्यों, करीबियों और रिश्तेदारों को भी चुनावी मैदान में उतार दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सत्ता और संगठन में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए इस बार कई बड़े राजनेता, विधायक, सांसद और मंत्री खुद चुनावी समर में उतरे हैं या उनके परिवार के लोग विभिन्न पदों के लिए ताल ठोक रहे हैं, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।

मंत्रियों और दिग्गजों के परिवारों की दोहरी दावेदारी

इस चुनावी रण में कई बड़े मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के परिजनों की सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन (यूडीएच) मंत्री झाबर सिंह खर्रा के परिवार ने श्रीमाधोपुर क्षेत्र से चुनावी मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया है, जहाँ उनकी पत्नी शांति देवी भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ रही हैं, जबकि उनके पुत्र अजय खर्रा भी भाजपा की ओर से मैदान में हैं। इसके अतिरिक्त उनके परिवार से एक अन्य सदस्य के निर्दलीय रूप में भी चुनावी ताल ठोकने की खबरें हैं। इसी प्रकार, नागौर जिले के वार्ड संख्या 15 से पूर्व विधायक सुखाराम नेतड़िया भाजपा के आधिकारिक टिकट पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, तो वहीं उदयपुर के मावली से विधायक पुष्कर लाल डांगी के पुत्र शांतिलाल भी जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ते हुए जिला प्रमुख पद के प्रबल दावेदारों में शुमार हैं।

रिश्तेदारों और परिजनों को टिकट दिलाने की मची होड़

राज्य के विभिन्न जिलों में राजनीतिक घरानों के कई अन्य नाम भी इस चुनावी जंग में प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। नागौर क्षेत्र में डॉ. मंजू शर्मा बाघामार के परिवार से श्वेता पंवार और पूर्व विधायक मंजू मेघवाल के परिवार से शंकरलाल मैदान में डटे हुए हैं। सीकर, कोटा, बांसवाड़ा, बीकानेर, भीलवाड़ा और डूंगरपुर जैसे प्रमुख जिलों में भी कई पूर्व मंत्रियों, सांसदों, विधायकों तथा पार्टी जिलाध्यक्षों की पत्नियाँ, पुत्र, पुत्रवधुएं और भाई चुनावी अखाड़े में अपनी राजनीतिक विरासत बचाने और बढ़ाने के लिए जोर-शोर से पसीना बहा रहे हैं। कई प्रमुख हस्तियों के परिजन जिला प्रमुख और प्रधान जैसे महत्वपूर्ण पदों की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं, जिसके चलते स्थानीय राजनीति में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।