जोधपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक विशेष अवकाशकालीन सुनवाई करते हुए बाड़मेर जिला परिषद के वार्ड संख्या 35 के चुनाव से जुड़ी एक महत्वपूर्ण याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस उम्मीदवार आवड़ दान का नामांकन पत्र बिना किसी ठोस कारण के और बिना सुनवाई का अवसर दिए ही खारिज कर दिया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए रविवार को हाईकोर्ट की विशेष पीठ ने अवकाश के दिन विशेष सुनवाई की और स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया के सुचारू रूप से जारी रहने के दौरान अदालत ऐसा कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी जिससे चुनाव प्रक्रिया बाधित हो या उसमें अनावश्यक देरी उत्पन्न हो।
नामांकन रद्दीकरण और उच्च न्यायालय में कानूनी चुनौती
विवाद की शुरुआत तब हुई जब बाड़मेर जिला परिषद के वार्ड संख्या 35 से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरने वाले आवड़ दान का नामांकन रिटर्निंग अधिकारी द्वारा रद्द कर दिया गया। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना था कि उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया और 15 अक्टूबर को अखबारों के माध्यम से नामांकन खारिज होने की जानकारी मिली। इसके तुरंत बाद न्याय की गुहार लगाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाय गया और चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप की मांग की गई, जिस पर अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनीं।
राज्य सरकार व निर्वाचन आयोग का पक्ष और वैधानिक प्रावधान
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने अदालत को बताया कि राजस्थान पंचायती राज (चुनाव) नियम, 1994 के नियम 80(c) के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी उम्मीदवार का नामांकन गलत तरीके से खारिज किया जाता है, तो चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर जिला न्यायाधीश के समक्ष चुनाव याचिका दायर की जा सकती है। सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि कानून के तहत एक स्पष्ट और वैकल्पिक कानूनी रास्ता पहले से ही उपलब्ध है, इसलिए मौजूदा चरण में याचिकाकर्ता सीधे हाईकोर्ट में राहत की मांग नहीं कर सकता।
न्यायाधीश डॉ. नूपुर भाटी का निर्णय और न्यायालय का इतिहास
मामले की सुनवाई कर रही न्यायाधीश डॉ. नूपुर भाटी ने सर्वोच्च न्यायालय के कई पूर्ववर्ती और ऐतिहासिक فیصلों का हवाला देते हुए व्यवस्था दी कि चुनावी प्रक्रिया के मध्य में न्यायालय को अपने असाधारण अधिकारों का उपयोग करके बाधा उत्पन्न नहीं करनी चाहिए। अदालत ने दोहराया कि याचिकाकर्ता के पास चुनाव संपन्न होने के बाद वैधानिक रूप से चुनाव याचिका दायर करने का प्रभावी विकल्प खुला हुआ है। इसी कानूनी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाईकोर्ट में रविवार के दिन विशेष सुनवाई का यह अनूठा मामला है, इससे पूर्व भी सितंबर माह में निकाय चुनावों और अन्य अर्जेंट मामलों को लेकर अवकाश के दिनों तथा रात्रि के समय भी विशेष सुनवाई किए जाने के दृष्टांत दर्ज हैं।

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