October 16, 2026

गुजरात में स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ी सौगात, चार जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की मंजूरी

अहमदाबाद। गुजरात में चिकित्सा शिक्षा के दायरे को और अधिक विस्तृत करने तथा आम नागरिकों को उनके गृह जिले में ही उच्च स्तरीय आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के कुशल मार्गदर्शन और स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया के नेतृत्व में राज्य के चार प्रमुख जिलों—खेड़ा, महीसागर, बोटाद और गिर-सोमनाथ में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त चार नए ब्राउनफील्ड मेडिकल कॉलेज स्थापित करने को आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी गई है। इन सभी परियोजनाओं को जनहित को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा, जिसके तहत संबंधित जिलों में इन मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के निर्माण व विकास की जिम्मेदारी चार प्रतिष्ठित संस्थाओं को सौंपी गई है।

विभिन्न जिलों में इन संस्थाओं को सौंपी गई जिम्मेदारी

राज्य सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन के लिए चार अलग-अलग संस्थाओं का चयन किया गया है, जिनमें:

  • खेड़ा जिला: श्री गया प्रसाद जैन चैरिटेबल ट्रस्ट, अहमदाबाद।

  • महीसागर जिला: श्री स्वामीनारायण विश्वमंगल गुरुकुल, कलोल (स्वामीनारायण यूनिवर्सिटी)।

  • गिर-सोमनाथ जिला: श्री चाणक्य एजुकेशन एंड चैरिटेबल ट्रस्ट, वेरावल।

  • बोटाद जिला: डेल्टा मिलेनियम मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड, भड़ियाद (मोरबी)।

इन परियोजनाओं के माध्यम से मौजूदा सरकारी जिला अस्पतालों को अपग्रेड करके चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक मजबूत और आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने स्पष्ट किया है कि इन पहलों का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को उनके अपने ही जिले में अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक से युक्त बेहतर उपचार मुहैया कराना और सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है।

निःशुल्क सेवाओं की अनिवार्यता और विशेष शर्तें

राज्य सरकार ने इन संस्थाओं को सख्त निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों में आम नागरिकों को वर्तमान में मिल रही सभी निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं पूर्ववत रूप से जारी रहनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, प्रसव के उपरांत गर्भवती महिलाओं तथा बीस दिन से लेकर एक वर्ष तक के नौनिहालों को पूरी तरह निःशुल्क चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है।

मरीजों के हितों की रक्षा और सुगम स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए कई कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं:

  • अस्पतालों में डायलिसिस सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए कम से कम दस बिस्तरों (बेड) की एक समर्पित यूनिट चलानी होगी।

  • सड़क दुर्घटनाओं और अन्य ट्रॉमा के गंभीर मरीजों को तत्काल और पूरी तरह निःशुल्क आपातकालीन उपचार देना आवश्यक होगा।

  • मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी सभी निर्धारित निःशुल्क सेवाएं निरंतर रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी।

इन तमाम प्रावधानों का मूल उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े परिवारों को समय पर उचित उपचार दिलाना तथा आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को त्वरित राहत पहुंचाना है।

जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बनेगी रोगी कल्याण समिति

मरीजों से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर संचालन, प्रभावी निगरानी और कुशल नियोजन के लिए संबंधित जिलों के जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक नई 'रोगी कल्याण समिति' का गठन किया जाएगा। इस समिति के माध्यम से अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के प्रबंधन और दैनिक सेवाओं के सुचारु संचालन में उल्लेखनीय मदद मिलने की पूरी उम्मीद है। राज्य सरकार के इस निर्णय से स्थानीय स्तर पर मेडिकल की पढ़ाई के लिए सीटों में इजाफा होगा, जिससे अधिक संख्या में डॉक्टर तैयार हो सकेंगे। साथ ही, ग्रामीण और दूरदराज के अंचलों में निवास करने वाले आम जनमानस को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक सीधी और सुलभ पहुंच मिल सकेगी। पीपीपी मॉडल के बावजूद गरीबों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य चिकित्सा सेवाओं का यह प्रावधान जनहित की दृष्टि से एक मील का पत्थर साबित होगा।