October 8, 2026

आउटसोर्स कर्मचारी की मौत के बाद बढ़ा विवाद, ग्रामीणों ने मांगा 50 लाख मुआवजा

नीमच: नीमच जिले के चीताखेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिसलवास कलां में बिजली लाइनों के मेंटेनेंस कार्य के दौरान करंट लगने से एक आउटसोर्स कर्मचारी प्रताप सिंह की आकस्मिक मौत के बाद मामला पूरी तरह गरमा गया है। इस दर्दनाक घटना से आक्रोशित होकर मृतक के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने विद्युत वितरण कंपनी के कार्यालय के ठीक सामने मुख्य मार्ग पर शव को रखकर जोरदार धरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का यह गंभीर आरोप है कि शटडाउन का निर्धारित समय पूरा होने से पहले ही मनमाने तरीके से हाईटेंशन लाइन को दोबारा चालू कर दिया गया था, जिसके चलते यह हादसा हुआ। 'करणी सेना परिवार' के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुरा भी इस धरने में विशेष रूप से पहुँचे और उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त हत्या का मामला दर्ज किए जाने की पुरजोर मांग उठाई।

क्या है पूरी घटना और कैसे हुआ हादसा?

विस्तृत जानकारी के अनुसार, बिसलवास कलां में बिजली की लाइन के मेंटेनेंस का काम चल रहा था और इसी दौरान प्रताप सिंह बिजली के खंभे पर चढ़कर अपना कार्य कर रहे थे। अचानक हाईटेंशन लाइन में तीव्र विद्युत प्रवाह (करंट) दौड़ गया, जिसकी चपेट में आने से वे गंभीर रूप से झुलस गए। करंट का जोरदार झटका लगने के कारण प्रताप सिंह खंभे से नीचे आ गिरे और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना के सामने आते ही परिजनों और स्थानीय नागरिकों में भारी रोष व्याप्त हो गया, और उन्होंने तुरंत शव को विद्युत वितरण कंपनी के कार्यालय के सामने मुख्य मार्ग पर रखकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

परिजनों के गंभीर आरोप: "समय से पहले बिना सूचना के चालू कर दी गई लाइन"

शव के साथ धरने पर बैठे परिजनों का मुख्य आरोप है कि विद्युत विभाग से दोपहर 3 बजे तक बिजली की लाइन बंद रखने का आधिकारिक 'शटडाउन परमिट' लिया गया था, परंतु निर्धारित समयावधि से पहले ही, लगभग दोपहर 2:30 बजे, बिना किसी पूर्व सूचना या चेतावनी के हाईटेंशन लाइन को चालू कर दिया गया। उनका कहना है कि इसी बड़ी लापरवाही के कारण प्रताप सिंह करंट की चपेट में आए। न्याय की आस में परिजन और ग्रामीण पूरी रात खुले आसमान के नीचे शव के पास ही बैठे रहे और कड़ा विरोध जताते हुए सड़क पर ही शव के समीप दीये जलाकर अपना रोष व्यक्त किया।

जीवन सिंह शेरपुरा का कड़ा रुख, हत्या का मामला दर्ज करने की मांग

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए 'करणी सेना परिवार' के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुरा भी धरना स्थल पर पहुँचे और उन्होंने धरने पर बैठे परिजनों के साथ बैठकर उच्चाधिकारियों से कार्रवाई की मांग की। श्री शेरपुरा ने इस घटना को एक सामान्य हादसा मानने से साफ इनकार कर दिया और इसे सीधे तौर पर एक आपराधिक कृत्य व 'हत्या' करार दिया। उनका आरोप था कि लाइन को दोबारा चालू करने से पहले फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों की सटीक संख्या और अटेंडेंस (उपस्थिति) की कोई जांच नहीं की गई थी।

जीवन सिंह शेरपुरा ने दोषी बिजली ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ हत्या की धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये का आर्थिक मुआवजा और परिवार के एक आश्रित सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग भी रखी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक शव को वहाँ से नहीं उठाया जाएगा। मृतक के परिजन महेंद्र सिंह शक्तावत ने भी यही दोहराया कि शटडाउन होने के बावजूद समय से पहले लाइन चालू की गई थी। उन्होंने बताया कि प्रताप सिंह अपने पूरे परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य (सहारा) थे, और उनके अचानक चले जाने से पूरे परिवार के सामने भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। परिजनों ने दोटूक कहा है कि केवल मौखिक आश्वासन से उनका यह धरना समाप्त नहीं होगा।

विद्युत वितरण कंपनी का पक्ष: तकनीकी जांच के बाद होगी नियमानुसार कार्रवाई

उधर, चल रहे इस उग्र विरोध प्रदर्शन और धरने के बीच विद्युत वितरण कंपनी के कार्यपालन यंत्री (Executive Engineer) महिप सोनी ने मीडिया और जनता के सामने कंपनी का आधिकारिक पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि इस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना की सूचना विभाग को दोपहर 3 से 3:30 बजे के बीच प्राप्त हुई थी, और उस वक्त क्षेत्र में 11 केवी और 33 केवी लाइनों के मेंटेनेंस का कार्य चल रहा था।

महिप सोनी के अनुसार, परमिट जारी करने की पूरी प्रक्रिया और लाइन अचानक चालू होने के वास्तविक तकनीकी कारणों की गहराई से जांच की जा रही है। इस जांच के दायरे में स्मार्ट मीटर का डेटा, लाइन पेट्रोलिंग रिपोर्ट और आधिकारिक लॉग शीट (Log Sheet) को भी शामिल किया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि तकनीकी जांच के दौरान जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त विभागीय और वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, कंपनी की ओर से शासन के निर्धारित नियमों के तहत पीड़ित परिवार को हरसंभव आर्थिक सहायता राशि उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।