डबरा: मध्य प्रदेश के डबरा में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल उस समय तेज हो गई जब नगर पालिका अध्यक्ष समेत कुल 28 पार्षदों ने सामूहिक रूप से अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सभी पार्षद गत मंगलवार (7 अक्टूबर) को एक साथ सिटी कोतवाली पहुँचे और पुलिस द्वारा की गई ‘बाउंड ओवर’ की कार्रवाई के खिलाफ अपना कड़ा विरोध जताया। इस दौरान बाउंड ओवर किए जाने के नोटिस को लेकर पार्षदों और एसडीओपी (SDOP) के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
क्या है पूरा विवाद और कैसे भड़का मामला?
करीब एक सप्ताह पहले डबरा नगर पालिका परिसर में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा तालाबंदी कर दी गई थी। इस गंभीर मामले में पार्षदों ने थाने पहुँचकर असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया था। इसके जवाब में पुलिस ने प्रदर्शनकारी पार्षदों पर ही धारा 107/16 के तहत ‘बाउंड ओवर’ की कार्रवाई कर दी। इस एकतरफा और दंडात्मक कार्रवाई से नाराज होकर सभी पार्षद थाने जा धमके और वहीं धरने पर बैठ गए।
पार्षदों का तीखा आरोप: "प्रशासन का है दोहरा रवैया"
धरने पर बैठे पार्षदों का आरोप है कि पुलिस का रवैया पूरी तरह से दोहरा और पक्षपातपूर्ण है। उनके अनुसार, खुलेआम उपद्रव करने वाले अपराधियों को छूट दी जा रही है, जबकि जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों पर बेवजह कार्रवाई की जा रही है। अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए पार्षदों ने मांग की कि उन पर लगाए गए सभी झूठे आरोप तत्काल प्रभाव से हटाए जाएं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक थाने में उनका धरना-प्रदर्शन निरंतर जारी रहेगा।
दूसरी ओर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयराज कुबेर ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि आप लोग बैठे हैं, तो बैठे रहें, किसी भी प्रकार की धारा को हटाया नहीं जाएगा। पार्षदों ने एक लिखित ज्ञापन के माध्यम से तहसीलदार, एसडीओपी और सिटी थाने के प्रभारी अधिकारियों को उनके पदों से हटाने की भी मांग की है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र, इस्तीफे की चेतावनी
डबरा पुलिस की इस दंडात्मक कार्रवाई से बुरी तरह परेशान और आहत होकर सभी पार्षदों की तरफ से प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक आधिकारिक पत्र लिखा गया है, जिसमें उन्होंने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने की बात कही है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच धर्मेंद्र सिंह हैप्पी, हरविंदर सिंह हीरा, सरदार सिंह कुशवाहा, सुमित साहू, लवलेश कैन और नगर पालिका अध्यक्ष के सुपुत्र जितेंद्र राजा के विरुद्ध की गई कार्रवाई को पार्षदों ने पूरी तरह झूठा और दुर्भावनापूर्ण बताया है।

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