कोलकाता: पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव के दौरान मतदान के बीच आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। वोट डालने के बाद उन्होंने राज्य प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं और गंभीर आरोप लगाए हैं।
पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप
हुमायूं कबीर ने आरोप लगाया कि पिछले दो महीनों से बहरामपुर के एसपी विशेष तौर पर मुस्लिम मतदाताओं और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को जबरन निशाना बना रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी के 64 लोगों को दो महीने से हिरासत में रखा गया है और उन्हें जमानत मिलने का कोई अवसर नहीं दिया जा रहा है। कबीर ने कहा कि जिन लोगों के भारतीय जनता पार्टी को वोट न देने की संभावना है, पुलिस उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण तरीके से कार्रवाई कर रही है। इससे पहले कार्यकर्ताओं की कथित गिरफ्तारी के विरोध में वे पुलिस थाने के सामने धरने पर भी बैठे थे और चुनाव आयोग से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की थी।
मतदान प्रतिशत और चुनाव परिणाम को लेकर दावा
हुमायूं कबीर ने दावा किया कि इस उपचुनाव में मतदान का प्रतिशत पहले जैसा नहीं रहेगा और चुनाव खत्म होने के बाद पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने यहां से चुनाव लड़ा था, तब उन्हें अकेले 1 लाख 24 हजार वोट मिले थे। इस बार 93 प्रतिशत मतदान होने की कोई संभावना नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल चुनाव को लेकर डरा हुआ है और रेजीनगर में बीजेपी के जीतने की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है।
निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना आयोग और सीएम की जिम्मेदारी
एजेयूपी प्रमुख ने कहा कि आम जनता को बिना किसी डर या भय के अपने मताधिकार का खुलकर इस्तेमाल करने की छूट मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराना चुनाव आयोग और राज्य के मुख्यमंत्री—दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है। उन्होंने पुलिस पर आम नागरिकों पर खुले तौर पर अत्याचार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई का असर चुनाव परिणामों पर अलग रूप से दिखाई देगा।

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