देश के सबसे प्रतिष्ठित और भरोसेमंद कारोबारी घराने माने जाने वाले टाटा समूह के भीतर चल रही अंदरूनी कलह और नेतृत्व संबंधी खींचतान अब शेयर बाजार के निवेशकों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। नमक से लेकर सॉफ्टवेयर, स्टील और विमानन क्षेत्र तक फैले इस विशाल व्यावसायिक साम्राज्य में गवर्नेंस और नेतृत्व को लेकर उपजा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस उठापटक का सबसे सीधा और बड़ा वित्तीय नुकसान टाटा समूह की विभिन्न कंपनियों में निवेश करने वाले आम और संस्थागत निवेशकों को उठाना पड़ा है।
महज 14 दिनों में निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट
इस कॉरपोरेट रस्साकशी और बाजार की अनिश्चितता के चलते मात्र 14 दिनों के भीतर ही निवेशकों के लगभग 1.53 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 17 सितंबर 2026 को टाटा समूह की कुल 26 सूचीबद्ध (Listed) कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) 25.73 लाख करोड़ रुपये था, जो 1 अक्तूबर तक घटकर मात्र 24.20 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है।
यह भारी गिरावट ऐसे समय में देखने को मिली है जब एक ओर टाटा संस के बोर्ड ने 17 सितंबर को कंपनी की अनिवार्य आईपीओ लिस्टिंग की तैयारियों को आगे बढ़ाने और एन. चंद्रशेखरन को पाँच साल का नया कार्यकाल देने का निर्णय लिया था, वहीं दूसरी ओर टाटा ट्रस्ट्स की ओर से टाटा संस के पुनर्गठन (Restructuring) का एक नया प्रस्ताव सामने आ गया। इस प्रस्ताव के तहत टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को टाटा संस में विलय करने की बात कही गई है, जिससे समूह की संपूर्ण कारोबारी संरचना और इसकी अनिवार्य लिस्टिंग का मार्ग प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय और निवेशकों के लिए सलाह
एक्सिस डायरेक्ट (Axis Direct) के डिप्टी हेड फंडामेंटल रिसर्च उत्तम कुमार श्रीमल ने इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि टाटा समूह के शेयरों में यह उठापटक और उतार-चढ़ाव अभी कुछ और समय तक जारी रह सकता है। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि उन्हें किसी भी कॉरपोरेट विवाद या घटनाक्रम से घबराने के बजाय संबंधित कंपनियों की तिमाही कमाई, व्यावसायिक बुनियाद (Fundamentals), नकदी प्रवाह (Cash Flow) और वैल्युएशन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। वर्तमान में शेयर बाजार की मुख्य नजर इस बात पर टिकी है कि टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और पुनर्गठन के इस प्रस्ताव पर कंपनी बोर्ड तथा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का अंतिम रुख क्या रहता है।
किन शेयरों पर पड़ा सबसे अधिक दबाव?
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के आँकड़ों के मुताबिक, 17 सितंबर से 1 अक्तूबर के बीच टाटा समूह के कई प्रमुख शेयर भारी दबाव में रहे। विशेष रूप से टाटा एल्क्सी, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और वोल्टास के शेयरों में काफी कमजोरी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शेयरों में आई यह बिकवाली इस बात का स्पष्ट संकेत है कि निवेशक कॉर्पोरेट गवर्नेंस, भविष्य की रणनीतिक दिशा और टाटा संस के ढाँचे को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता के कारण बेहद सतर्क हो गए हैं। चूँकि टाटा संस खुद शेयर बाजार में सीधे सूचीबद्ध (Listed) नहीं है, इसलिए समूह के भीतर चल रहे इस विवाद का पूरा असर उसकी सहायक लिस्टेड कंपनियों के शेयरों पर साफ दिखाई दे रहा है।
प्रमुख शेयरों में दर्ज की गई गिरावट के आँकड़े
| टाटा समूह की प्रमुख कंपनियाँ | 1 अक्तूबर को दर्ज की गई गिरावट (%) |
| तेजस नेटवर्क | 4.42% |
| टाटा स्टील | 3.01% |
| टाटा कैपिटल | 2.62% |
| टाटा पावर | 2.51% |
| इंडियन होटल | 1.76% |
| टाटा मोटर्स पीवी | 1.70% |
| ट्रेंट | 1.60% |
| टाइटन कंपनी | 1.44% |
| टाटा टेलीकम्यूनिकेशन | 1.17% |
| टाटा इन्वेस्टमेंट | 0.93% |

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