अजमेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के बहुचर्चित निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा गिरफ्तारी के साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी आधिकारिक तौर पर बर्खास्त नहीं किए जा सके हैं। खास बात यह है कि आगामी 14 अक्टूबर को उनका कार्यकाल स्वतः पूरा हो जाएगा, जिसके बाद आयोग में सदस्यों के कुल चार पद रिक्त हो जाएंगे।
पेपर लीक मामलों से जुड़ा है विवाद
वरिष्ठ अध्यापक भर्ती-2022 के पेपर लीक मामले में एसओजी (SOG) ने 18 अप्रैल 2023 को बाबूलाल कटारा, आयोग के बर्खास्त ड्राइवर गोपाल सिंह और विजय कटारा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जनवरी 2024 में तत्कालीन राज्यपाल कलराज मिश्र ने कटारा को निलंबित कर दिया था। जांच आगे बढ़ने पर कटारा की संलिप्तता सब इंस्पेक्टर भर्ती-2021 के पेपर लीक मामले में भी सामने आई। एसीबी (ACB) द्वारा जुटाई गई संपत्ति की जानकारी में उनकी आय से करीब 60 फीसदी अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ था।
क्या है संवैधानिक बर्खास्तगी की प्रक्रिया?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत राज्य लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को हटाने या निलंबित करने की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित है।
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इस अनुच्छेद के अनुसार, यदि किसी सदस्य या अध्यक्ष के खिलाफ कदाचार या अन्य गंभीर आरोप हैं, तो मामला जांच के लिए उच्चतम न्यायालय को निर्देशित किया जाता है।
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राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट और प्रतिवेदन मिलने के बाद ही बर्खास्तगी के आधिकारिक आदेश जारी करते हैं। इसी जटिल प्रक्रिया के चलते निलंबन के बावजूद समय पर बर्खास्तगी की कार्रवाई पूरी नहीं हो पाई।
आरपीएससी में रिक्त होते पद और प्रशासनिक ढांचा
आयोग में बीते जून महीने से कोई स्थायी अध्यक्ष नहीं है और फिलहाल कार्यवाहक अध्यक्ष का प्रभार सदस्य लेफ्टिनेंट कर्नल केसरीसिंह संभाल रहे हैं। आयोग की संरचना में कुल 1 स्थायी अध्यक्ष, 10 सदस्य, 1 सचिव, 1 मुख्य परीक्षा नियंत्रक, 1 संयुक्त सचिव और 1 विधि परामर्शी सहित अन्य पद शामिल होते हैं। बाबूलाल कटारा के कार्यकाल की समाप्ति के बाद आयोग में सदस्यों के चार पद खाली हो जाएंगे।
77 सालों में मात्र सात महिला सदस्य
RPSC के 77 साल के इतिहास में लैंगिक प्रतिनिधित्व की स्थिति बेहद सीमित रही है। इन वर्षों में अब तक केवल सात महिलाएं ही आयोग की सदस्य बन पाई हैं, जिनके नाम निम्नलिखित हैं:
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कांता कथूरिया
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कमला भील
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डॉ. प्रकाशवती शर्मा
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दिव्या सिंह
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राजकुमारी गुर्जर
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डॉ. मंजु शर्मा
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डॉ. संगीता आर्य
वर्तमान में आयोग के 'फुल कमीशन' में एक भी महिला सदस्य नहीं है और फिलहाल सभी छह सक्रिय सदस्य पुरुष हैं।

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