लखनऊ| लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) के छात्रावासों की मेस में परोसे जा रहे भोजन की निम्न और खराब गुणवत्ता को लेकर विद्यार्थियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार की शाम को कैलाश हॉस्टल की मेस के खाने में कीड़े निकलने की गंभीर शिकायत लेकर भारी संख्या में छात्राएँ शाम करीब साढ़े पाँच बजे सीधे कुलपति कार्यालय पहुँच गईं। इस दौरान जिम्मेदार अधिकारियों के न मिलने पर छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने प्रशासनिक भवन के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
कुलपति कार्यालय के बाहर धरना और छात्राओं की बेहोशी
जब प्रदर्शन के दौरान मौके पर कुलपति और कुलसचिव छात्राओं से मिलने नहीं पहुँचे, तो वे कार्यालय के मुख्य द्वार के बाहर ही धरने पर बैठ गईं और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगीं। यह विरोध प्रदर्शन रात के लगभग 1:30 बजे तक लगातार जारी रहा। लंबी ठंड और तनावपूर्ण माहौल के बीच इस दौरान तीन छात्राएँ अस्वस्थ होकर बेहोश भी हो गईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अंततः चीफ प्रोवोस्ट ने तत्काल प्रभाव से संबंधित हॉस्टल की मेस को बंद करने का आदेश जारी किया।
कुलपति आवास की ओर कूच और परिसरों में जड़े ताले
इससे पूर्व, रात के 10:30 बजे तक भी जब कुलपति छात्राओं की सुधि लेने नहीं आए, तो आक्रोशित छात्राओं ने कुलपति के आधिकारिक आवास की ओर कूच करने का निर्णय लिया। छात्राओं का आरोप है कि उन्हें रोकने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने गेट नंबर तीन पर ताला जड़ दिया और वहाँ तैनात सुरक्षा गार्ड भी गायब मिले। इसके बाद छात्राएँ गेट नंबर चार पर पहुँचीं, लेकिन वहाँ भी ताला बंद मिला।
छात्राओं का कहना था कि वे आधी रात तक अंधेरे में परिसर के भीतर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करती रहीं, परंतु उनकी सुनने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। रात के 12 बजे तक भी 70 से अधिक छात्राएँ विश्वविद्यालय परिसर में डटी हुई थीं। उनका मुख्य आरोप था कि मेस में हमेशा भारी गंदगी बनी रहती है और पिछले करीब एक महीने से लगातार खाने में कीड़े निकल रहे हैं। कुछ दिन पहले स्वयं कुलपति ने हॉस्टल का औचक निरीक्षण कर व्यवस्था सुधारने के सख्त निर्देश दिए थे, इसके बावजूद मेस के खाने की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ।
प्रोवोस्ट की स्वीकारोक्ति और छात्र नेताओं की मौजूदगी
मौके पर मौजूद कैलाश हॉस्टल की प्रोवोस्ट डॉ. बबिता ने भी स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा कि मेस के भोजन की क्वालिटी कुछ दिनों के लिए ठीक की जाती है, और फिर से वही लापरवाही शुरू हो जाती है। मेस संचालक से कई बार औपचारिक शिकायत करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान चीफ प्रोवोस्ट प्रो. आशीष अवस्थी, प्रोवोस्ट ओपी शुक्ला के अलावा एनएसयूआई के छात्र नेता प्रिंस प्रकाश और समाजवादी लोहिया वाहिनी के अभिषेक श्रीवास्तव 'बाबू' समेत कई छात्र नेता भी छात्राओं के समर्थन में मौजूद रहे।
मेस का ठेका बदलने के बाद अचानक बढ़े प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के तर्ज पर अनोखे और व्यंग्यात्मक नारे लगाए, जैसे— "एक कचौड़ी दो समोसा, मेस वालों पर नहीं भरोसा". शिक्षा जगत और परिसर में इस बात की चर्चा है कि आखिर पिछले एक महीने में ऐसा क्या बदलाव हुआ कि आए दिन छात्र मेस के खाने को लेकर आंदोलित हो रहे हैं। जानकारों के अनुसार, पिछले कई वर्षों से जिस पुराने संचालक के पास मेस चलाने की जिम्मेदारी थी, उसे कुछ समय पूर्व हटाकर एक नई कंपनी को ठेका सौंप दिया गया है, और उसके तुरंत बाद से ही इस तरह के ताबड़तोड़ प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। हालाँकि, विश्वविद्यालय का एक अन्य वर्ग इसके पीछे अंदरखाने की किसी अन्य राजनीतिक या प्रशासनिक खींचतान की आशंका भी जता रहा है।

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