September 30, 2026

अनुकंपा नियुक्ति से पदोन्नति तक बदल सकते हैं नियम, भर्ती प्रक्रिया में भी संशोधन के संकेत

भोपाल। मध्य प्रदेश स्थापना दिवस (1 नवंबर) से ठीक पहले राज्य सरकार कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण और लंबित मामलों पर बड़े नीतिगत निर्णय ले सकती है। शासन स्तर पर अनुकंपा नियुक्ति, पदोन्नति, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, सेवा शर्तों और आचरण नियमों में बदलाव से जुड़े प्रस्तावों पर तेजी से मंथन चल रहा है। इसके साथ ही, युवाओं और अभ्यर्थियों के हित में भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए समान प्रकृति के पदों पर अलग-अलग परीक्षाओं के बजाय अब एक ही साझा परीक्षा आयोजित करने की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को इस संबंध में जल्द से जल्द ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

अनुकंपा नियुक्ति और संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर मंथन

प्रदेश में लंबे समय से विभिन्न विभागों में अनुकंपा नियुक्तियों के मामले लंबित चले आ रहे हैं। हाल ही में भले ही स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 700 से अधिक अनुकंपा नियुक्तियों के आदेश जारी किए गए हों, लेकिन अन्य विभागों में अभी भी कई मामले अटके हुए हैं।

  • संविदा नीति: संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति और नियमितीकरण को लेकर स्पष्ट नीति की दरकार है। मुख्यमंत्री द्वारा घोषित वर्ष 2023 की नीति (जिसके तहत 50% पदों पर संविदा कर्मियों को नियमित करने का प्रावधान है) को कई विभागों में पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।

  • ऊर्जा विभाग ने लगभग 6 हजार पदों पर विभागीय परीक्षा के जरिए संविदा कर्मियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की है, और अब अन्य विभागों में भी इसी तर्ज पर निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।

सीपीसीटी (CPCT) की अनिवार्यता पर मिल सकती है राहत

चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी के पदों पर पदोन्नति के मामले में कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा (CPCT) की अनिवार्यता कर्मचारियों के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई है। कई मामलों में कर्मचारियों को पदोन्नति मिलने के बाद भी सीपीसीटी की शर्त न पूरी कर पाने के कारण पदावनत (Demote) तक किया गया है।

  • नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया था, जहां तय तीन साल में सीपीसीटी पास न कर पाने के कारण एक कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी गईं, जिसके बाद कर्मचारी संगठनों ने इस नियम का कड़ा विरोध किया है।

  • इसे देखते हुए सरकार अनुकंपा नियुक्तियों और चतुर्थ से तृतीय श्रेणी की पदोन्नति में सीपीसीटी की अनिवार्यता समाप्त करने या उसमें आवश्यक छूट देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

पदोन्नति के नियमों में ढील और पात्रता अवधि में छूट संभव

पदोन्नति की राह देख रहे कर्मचारियों के लिए भी राहत भरी खबर आ सकती है। वर्तमान नियमों के तहत कई संवर्गों में पदोन्नति के लिए 5 साल की न्यूनतम सेवा अवधि तय है। प्रस्तावित बदलावों के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में इस सेवा अवधि में छूट देकर कर्मचारियों को जल्द पदोन्नति का अवसर दिए जाने पर विचार चल रहा है, जिससे लंबे समय से अटके मामलों का निपटारा हो सकेगा।

भर्ती परीक्षाओं में बार-बार की माथापच्ची से मिलेगी मुक्ति

युवाओं और अभ्यर्थियों के समय व संसाधनों की बचत के लिए सरकार भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत अब समान प्रकृति के पदों के लिए अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित करने के बजाय एक संयुक्त या साझा परीक्षा कराई जा सकती है। इससे न केवल प्रशासनिक कामकाज आसान होगा, बल्कि चयन प्रक्रिया में लगने वाले समय में भी भारी कमी आएगी।

मध्य प्रदेश स्थापना दिवस से पहले आने वाले इन संभावित फैसलों पर प्रदेशभर के लाखों कर्मचारियों और संगठनों की निगाहें टिकी हुई हैं। विभागों की अंतिम प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन प्रस्तावों पर मुहर लगने की पूरी संभावना है।