बीजिंग/मनीला। दक्षिण चीन सागर (South China Sea) एक बार फिर चीन और फिलीपींस के बीच तनाव का बड़ा अखाड़ा बन गया है। कुछ समय की खामोशी के बाद इस सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से गतिरोध लगातार गहराता जा रहा है। हालिया तनाव तब और बढ़ गया जब फिलीपींस ने चीनी नौसेना और कोस्ट गार्ड पर उसके नियमित रोटेशन और सप्लाई मिशन को जबरन रोकने का गंभीर आरोप लगाया।
सप्लाई मिशन पर रोक और विवाद का केंद्र 'सेकेंड थॉमस शोल'
फिलीपींस के अनुसार, उसका यह सप्लाई मिशन 'सेकेंड थॉमस शोल' (Second Thomas Shoal) पर तैनात अपने सैनिकों तक जरूरी सामान और रसद पहुंचाने के लिए भेजा गया था, लेकिन चीनी जहाजों ने बेहद खतरनाक तरीके से उनका रास्ता रोक दिया। सुरक्षा कारणों से फिलीपींस को इस मिशन को अस्थायी तौर पर रोकना पड़ा।
इस पूरे भू-राजनीतिक विवाद के केंद्र में 'सेकेंड थॉमस शोल' स्थित है, जहां फिलीपींस ने साल 1999 में अपने एक पुराने युद्धपोत 'बीआरपी सिएरा माद्रे' (BRP Sierra Madre) को जानबूझकर जमीन पर खड़ा कर दिया था। फिलीपींस इसी जहाजी ठिकाने के जरिए क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी दर्ज कराता है और समय-समय पर सैनिकों व जरूरी सामान की आपूर्ति करता है। दूसरी ओर, चीन इस पूरे इलाके पर अपना संप्रभुता का दावा करता है और फिलीपींस की इस मौजूदगी का कड़ा विरोध करता है, जिसके चलते दोनों देशों के सुरक्षा बल अक्सर आमने-सामने आ जाते हैं। इससे पहले जुलाई में दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प भी हुई थी, जिसमें लाठी-डंडे चलने से एक फिलीपीनी सैनिक घायल हो गया था।
फिलीपींस की बढ़ती सैन्य ताकत और ब्रह्मोस मिसाइल
क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबाव के बीच फिलीपींस अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है। इसी रणनीति के तहत फिलीपींस ने भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम (BrahMos Missile) खरीदा है।
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रक्षा सौदा: साल 2022 में लगभग 37.5 करोड़ डॉलर का यह रक्षा समझौता हुआ था, जिसके तहत 2024 में मिसाइलों की पहली खेप फिलीपींस पहुंच चुकी है।
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मारक क्षमता: लगभग 290 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली इन मिसाइलों को अब फिलीपीनी मरीन कॉर्प्स अपने तटीय रक्षा ढांचे में शामिल कर रही है। सितंबर महीने में अमेरिकी और फिलीपीनी सेना ने संयुक्त अभ्यास भी किया, जिसमें इन तटीय एंटी-शिप मिसाइल प्रणालियों के संचालन का अभ्यास किया गया।
फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि देश की सैन्य क्षमता को बढ़ाने का एकमात्र उद्देश्य अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है, न कि किसी देश के साथ युद्ध की स्थिति पैदा करना।
चीन की प्रतिक्रिया और बीजिंग का रुख
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन ने फिलीपींस पर उसके समुद्री क्षेत्र में लगातार उकसावे वाली गतिविधियां बढ़ाने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी एक बयान में चीन ने कहा कि फिलीपींस चीनी द्वीपों और चट्टानों के आसपास लगातार अतिक्रमण कर रहा है, और चीनी कोस्ट गार्ड इन गतिविधियों को रोकने के लिए अपनी कार्रवाई जारी रखेगा।
बीजिंग ने सेकेंड थॉमस शोल पर फिलीपींस की मौजूदगी को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए यह साफ कर दिया है कि वह केवल मानवीय आवश्यकताओं के लिए कुछ सीमित सप्लाई मिशनों की अनुमति दे सकता है, लेकिन फिलीपींस को वहां किसी भी प्रकार का स्थायी सैन्य ढांचा खड़ा करने या नया निर्माण करने की बिल्कुल छूट नहीं दी जाएगी।
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