भोपाल। शराब टेंडर में शामिल होने का प्रयास कर रही सोम डिस्टलरीज को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने कंपनी को टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने की मांग को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कंपनी की तकनीकी बोली पहले ही निरस्त की जा चुकी है और उसके पास वैध लाइसेंस भी नहीं है, जिसके चलते टेंडर में शामिल करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। हालांकि, कोर्ट ने लाइसेंस नवीनीकरण (रिन्युअल) के आवेदन को खारिज करने वाले 18 जून के आदेश की वैधता का मामला सिंगल बेंच के समक्ष भेज दिया है।
क्या है पूरा मामला?
सोम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड और सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज प्राइवेट लिमिटेड ने अपने लाइसेंस निलंबन और टेंडर में भाग लेने से रोके जाने के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कंपनियों का कहना था कि कार्रवाई से पहले उन्हें पर्याप्त सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया, जबकि आबकारी विभाग ने इसे आबकारी कानूनों के तहत वैध कार्रवाई बताया।
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आबकारी विभाग ने दोनों कंपनियों के कुल 8 लाइसेंस निलंबित किए थे, जिसके संबंध में 4 फरवरी 2026 को आबकारी आयुक्त ने आदेश जारी किया था।
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मार्च में सिंगल बेंच द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद कंपनियां युगलपीठ में अपील के लिए पहुंची थीं।
तीन बेंचों तक पहुंचा मामला
सोम डिस्टलरीज से जुड़ा यह कानूनी विवाद हाईकोर्ट में विभिन्न न्यायमूर्तियों की बेंचों के सामने विचाराधीन रहा है। शुरुआत में न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की बेंच में सुनवाई के बाद मामला न्यायमूर्ति एसएन भट्ट और फिर न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की बेंच के पास गया। अब युगलपीठ के ताजा आदेश के बाद लाइसेंस रिन्युअल के 18 जून के आदेश की वैधता पर सिंगल बेंच में सुनवाई होगी, जिससे कंपनी के लाइसेंस से जुड़ा मूल विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

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