September 19, 2026

नकल के शक और तनाव में छात्र का खौफनाक कदम: आईआईटी प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप

मुंबई। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे परिसर में एक बेहद दुखद और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां बीटेक द्वितीय वर्ष के एक छात्र ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है। इस घटना के बाद से छात्र समुदाय में गहरा आक्रोश व्याप्त है और आईआईटी प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वकोडे ने परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए कथित तौर पर प्रश्नपत्र चैटजीपीटी (ChatGPT) पर अपलोड किया था, ताकि सवालों के जवाब हासिल किए जा सकें। परीक्षा हॉल में पकड़े जाने के बाद संस्थान के अधिकारियों, प्रशिक्षक और विभागाध्यक्ष ने छात्र से बातचीत की थी और उसे समझाया था। अधिकारियों का दावा है कि छात्र को यह भरोसा भी दिलाया गया था कि इस छोटी सी घटना का उसके शैक्षणिक करियर पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा और उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। इसके बाद छात्र अपने हॉस्टल के कमरे में लौट गया, जहां शाम को वह मृत पाया गया। आईआईटी बॉम्बे ने छात्र की मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि इस दुखद घटना की जांच उचित अधिकारियों द्वारा की जा रही है और प्रभावित छात्रों व परिजनों को पूरी सहायता दी जा रही है।

छात्रों का प्रदर्शन और गंभीर आरोप

इस घटना के सामने आते ही आईआईटी पवई परिसर में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि संस्थान इस घटना से जुड़ी पूरी सच्चाई छुपा रहा है। छात्रों का दावा है कि मृतक छात्र को परीक्षा में नकल के आरोप में एक साल के निलंबन की धमकी दी गई थी। उनका कहना है कि निलंबन की स्थिति में छात्र को छात्रावास खाली करना पड़ता और उसका चार साल का इंजीनियरिंग कोर्स बढ़कर पांच साल या उससे भी अधिक हो जाता। छात्रों का मानना है कि इसी मानसिक दबाव और भय के कारण साहिल ने यह खौफनाक कदम उठाया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

प्रशासन से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग

छात्रों का कहना है कि इस साल कैंपस में ऐसी चार दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें से दो घटनाएं पिछले दो महीनों के भीतर हुई हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की है कि संस्थान के निदेशक और डीन इस मामले पर स्पष्ट रिपोर्ट दें, जिसमें जांच की प्रक्रिया, जवाबदेही और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।