चेन्नई : उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार को राज्य के प्रत्येक जिले में 'नवोदय विद्यालय' स्थापित करने के लिए आवश्यक भूमि चिह्नित करने संबंधी अपने 15 दिसंबर 2025 के आदेश का पालन करने का सख्त निर्देश दिया। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने संघीय ढांचे का हवाला देते हुए राज्य सरकार को इस विषय पर अपना दृष्टिकोण बदलने की सलाह दी।
अदालत की टिप्पणी: "दिल्ली और चेन्नई को अलग नहीं होना चाहिए"
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Collaborative Federalism) के महत्व को रेखांकित किया:
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संघीय व्यवस्था पर सवाल: पीठ ने टिप्पणी की कि यदि समवर्ती सूची (Concurrent List) के तहत केंद्र सरकार कोई कल्याणकारी नीति लाती है और प्रत्येक राज्य उसे लागू करने से मना करने लगे, तो देश की संघीय व्यवस्था प्रभावित होगी।
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तालमेल की आवश्यकता: अदालत ने कहा कि "चेन्नई को दिल्ली से और दिल्ली को चेन्नई से अलग नहीं होना चाहिए," तथा दोनों पक्षों को संवाद के जरिए समाधान निकालने का निर्देश दिया।
तमिलनाडु को मिला 3 महीने का अतिरिक्त समय
तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने बताया कि राज्य ने 15 दिसंबर 2025 के उस आदेश को वापस लेने (Recall) की याचिका दायर की है, जिसमें 6 सप्ताह के भीतर जमीन चिह्नित करने का निर्देश दिया गया था।
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वापसी से इनकार: पीठ ने स्पष्ट किया कि वह अपने पूर्व आदेश को वापस नहीं ले रही है।
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समयसीमा का विस्तार: हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 3 महीने का अतिरिक्त समय प्रदान किया। यह निर्देश राज्य की विशेष अनुमति याचिका (SLP) के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।
भाषा विवाद और तमिलनाडु सरकार का पक्ष
तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों की स्थापना का विरोध मुख्य रूप से इन स्कूलों के पाठ्यक्रम में लागू 'त्रि-भाषा सूत्र' (Three-Language Formula) को लेकर रहा है:
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हिंदी पर पीठ की टिप्पणी: पीठ ने कहा कि केवल इस आधार पर नवोदय विद्यालयों को रोका नहीं जाना चाहिए कि वहां हिंदी पढ़ाई जाती है।
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राज्य की सफाई: राज्य के वकील जयदीप गुप्ता ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु सरकार हिंदी शिक्षण का विरोध नहीं कर रही है और राज्य में पहले से ही ऐसे कई विद्यालय संचालित हैं जहां हिंदी पढ़ाई जाती है।

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