September 10, 2026

आसमान में बारिश का अलर्ट, जमीन पर खिले कांस के फूल बोले- बदलने वाला है मौसम

जयपुर: राजस्थान में मौसम विभाग ने एक बार फिर से वर्षा की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान जताया है। 11 सितंबर से राज्य में नए सिरे से बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है, जिसका प्रभाव 12 और 13 सितंबर को जयपुर, भरतपुर, अजमेर, कोटा तथा उदयपुर संभागों में देखने को मिल सकता है। 11 सितंबर के लिए पांच जिलों में भारी बारिश का 'यलो अलर्ट' भी जारी किया गया है। दूसरी ओर, जयपुर-कूकस मार्ग की हरी-भरी पहाड़ियों में खिले सफेद कांस के फूल मानसून की विदाई और शरद ऋतु के आगमन का प्राकृतिक संदेश दे रहे हैं।

बंगाल की खाड़ी में बने तंत्र से बदलेगा मौसम, पश्चिमी राजस्थान में रहेगा शुष्क प्रभाव

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर दिशा की ओर खिसकी हुई है, जिससे बीते कुछ दिनों से राज्य में बारिश कमजोर पड़ी है। हालांकि, अब बंगाल की खाड़ी में आकार ले रहा नया कम दबाव का क्षेत्र (लो-प्रेशर सिस्टम) उत्तर-पश्चिम की तरफ बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से मध्य भारत में मूसलाधार बारिश और राजस्थान के पूर्वी व दक्षिणी हिस्सों में मध्यम से तेज वर्षा हो सकती है, जबकि पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश भागों में मौसम मुख्यतः शुष्क बना रहेगा।

धूप खिलने से चढ़ा पारा, श्रीगंगानगर में 39.4 डिग्री पहुंचा अधिकतम तापमान

हाल के दिनों में बारिश थमने और धूप निकलने के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बीते दिन श्रीगंगानगर में अधिकतम तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके अतिरिक्त जयपुर में 35 डिग्री, कोटा में 34.4 डिग्री और अजमेर में 33.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। प्रदेश के 10 से अधिक शहरों में पारा 35 डिग्री के पार बना हुआ है।

कांस के फूलों से क्यों माना जाता है मानसून की विदाई का संकेत?

भारतीय परंपरा और लोक मान्यताओं में कांस के सफेद फूलों का खिलना वर्षा ऋतु के समापन और शरद ऋतु के आरंभ का सूचक माना जाता है। गोस्वामी तुलसीदास ने भी रामचरितमानस में लिखा है— "फूले कास सकल मही छाई, जनु बरसा कृत प्रकट बुढ़ाई।' अर्थात कांस के फूलों से आच्छादित धरती इस बात का प्रमाण है कि वर्षा ऋतु अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। कूकस क्षेत्र की पहाड़ियों पर दूर तक फैले ये सफेद फूल प्राकृति के इस मनोरम बदलाव की सुंदर तस्वीर पेश कर रहे हैं।

मौसम पूर्वानुमान और प्राकृतिक संकेतों का अनोखा संगम

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक कमलेश शर्मा के अनुसार, कांस (एक प्रकार की जंगली घास) बिना किसी मानवीय प्रयास के खुली जमीनों, नदी-नालों के किनारे और नम मिट्टी में स्वतः ही उगती है। यद्यपि कांस का खिलना मौसम के प्राकृतिक चक्र में बदलाव का संकेत है, फिर भी वैज्ञानिक पूर्वानुमान यह स्पष्ट करते हैं कि मानसून पूरी तरह से विदा होने से पूर्व 11 से 13 सितंबर के बीच प्रदेश के कई अंचलों को एक बार फिर भिगोएगा।