September 1, 2026

पंजाब यूनिवर्सिटी में ABVP का दबदबा कायम, लगातार दूसरी जीत ने दिए बड़े सियासी संकेत

चंडीगढ़ | पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दूसरी बार अध्यक्ष (प्रधान) पद पर अपना परचम लहराया है और कैंपस की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ का अहसास कराया है। आगामी वर्ष फरवरी में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आई इस जीत को राज्य की मुख्यधारा की राजनीति के लिए भी एक बड़ा और अहम संकेत माना जा रहा है।

झाड़ू तोड़कर मनाया गया अनोखा जश्न

अंकित बिधान की इस धमाकेदार जीत के बाद एबीवीपी समर्थकों का उत्साह चरम पर था। समर्थकों ने अनूठे अंदाज में झाड़ू तोड़कर अपना जश्न मनाया, जिसे राजनीतिक गलियारों में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के खिलाफ एक सीधे और कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इस बार एबीवीपी और एसैप (ASAP) के बीच का मुकाबला महज छात्रसंघ के मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनाव परिणाम के बाद का यह जश्न कैंपस की सीमाओं को लांघकर पंजाब की व्यापक राजनीतिक हलचल से जुड़ गया है।

सोई (SOI) के समर्थन से पूरी तरह बदला चुनावी गणित

इस बार के पीयू छात्रसंघ चुनाव में सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव एबीवीपी और शिरोमणि अकाली दल के छात्र संगठन 'सोई' (Student Organisation of India) का एक मंच पर आना रहा। चुनाव से ठीक दो दिन पहले सोई ने एबीवीपी को अपना समर्थन देने का ऐलान किया। दिलचस्प बात यह रही कि इतिहास में पहली बार सोई ने पीयू कैंपस में प्रधान पद के लिए अपना कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा था।

इस चुनाव में एबीवीपी के अंकित बिधान का मुख्य मुकाबला आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन 'एसैप' के प्रत्याशी आदिल बराड़ से था। आदिल बराड़ ने एबीवीपी को कड़ी टक्कर दी, लेकिन अंततः बाजी एबीवीपी के हाथ लगी। विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में भारतीय जनता पार्टी और अकाली दल के बीच संभावित राजनीतिक नजदीकियों की चर्चाओं के बीच, दोनों दलों के छात्र संगठनों का यह गठजोड़ भविष्य के सियासी समीकरणों की एक बड़ी झलक पेश करता है।

लगातार दूसरी बार एबीवीपी की ऐतिहासिक जीत

एबीवीपी ने लगातार दूसरी बार पीयू छात्रसंघ के शीर्ष पद पर कब्जा किया है। इससे पिछले चुनाव में गौरववीर सोहल ने एबीवीपी के टिकट पर प्रधान पद जीता था, तब संगठन को अकाली दल का प्रत्यक्ष समर्थन हासिल नहीं था। इस बार एबीवीपी ने अपनी पुरानी जीत को दोहराते हुए न केवल अपनी साख मजबूत की, बल्कि सोई का साथ पाकर अपने जनाधार को और व्यापक बना लिया है।

युवा वोट बैंक और राजनीतिक दलों की नजरें

पंजाब विधानसभा चुनाव की बिसात बिछने से ठीक पहले आए इस छात्रसंघ चुनाव के परिणाम भाजपा के लिए बेहद मायने रखते हैं, क्योंकि यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति को हमेशा से युवा वर्ग के राजनीतिक रुझान का थर्मामीटर माना जाता है। एबीवीपी की इस जीत से भाजपा को युवा वोट बैंक के बीच अपनी पैठ मजबूत होने का मनोवैज्ञानिक लाभ मिल सकता है। वहीं, दूसरी ओर 'आप' के लिए यह परिणाम अपने छात्र संगठन और युवा संपर्क रणनीतियों की गहन समीक्षा करने का संकेत है। हालांकि भाजपा और अकाली दल के बीच किसी आधिकारिक चुनावी गठबंधन की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन पीयू कैंपस में एबीवीपी और सोई का यह वैचारिक व राजनीतिक मेल आने वाले दिनों में बड़े सियासी बदलावों का संकेत जरूर दे रहा है।