August 31, 2026

मानसून की मेहरबानी से बांध हुए भरपूर, औसत जलभंडारण 88 फीसदी के पार

रायपुर| छत्तीसगढ़ में अगस्त माह के दौरान हुई लगातार और झमाझम मानसूनी बारिश के चलते प्रदेश के तमाम बड़े, मध्यम और छोटे बांधों तथा जलाशयों में जलभराव की स्थिति बेहद शानदार हो गई है। कई प्रमुख जलाशय पूरी तरह से 100 फीसदी भर चुके हैं, और ओवरफ्लो होने की स्थिति में इनसे अतिरिक्त पानी भी छोड़ा जा रहा है। पिछले 30 दिनों के भीतर ही प्रदेश के बांधों में औसत जल भंडारण बढ़कर 88 फीसदी से अधिक पहुंच गया है। गत 30 जुलाई को यह औसत करीब 79 फीसदी था, यानी केवल अगस्त के महीने में ही औसत जल भंडारण में लगभग 9 फीसदी की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सभी संभागों में अच्छी बारिश का सकारात्मक असर

राज्य के सभी संभागों में हुई झमाझम बारिश का सीधा असर बांधों के जलस्तर पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। हालांकि, इन सबके बावजूद अभी भी दो बड़े बांध ऐसे हैं जिनमें जलभराव 50 फीसदी से कम बना हुआ है। इनमें बिलासपुर जिले का अरपा भैंसाझार और रायगढ़ जिले का केलो बांध शामिल हैं; जहाँ वर्तमान में अरपा भैंसाझार में 37.42 प्रतिशत और केलो बांध में 37.03 प्रतिशत ही जलभराव दर्ज किया गया है।

पिछले तीन वर्षों की तुलना में बेहतर स्थिति

बीते तीन वर्षों के दौरान प्रदेश के बांधों में पानी के भंडारण का रिकॉर्ड लगभग एक जैसा रहा है, लेकिन इस वर्ष 30 अगस्त तक की स्थिति पिछले दो सालों के मुकाबले काफी बेहतर है। वर्ष 2024 में 30 अगस्त के वक्त बांधों का औसत जल भंडारण करीब 85 प्रतिशत था, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 84 प्रतिशत रिकॉर्ड किया गया था। इस बार यह बढ़कर 88 फीसदी से ज्यादा हो गया है।

प्रमुख जलाशयों की स्थिति

  • खारंग और कोडार बांध: बिलासपुर जिले का प्रसिद्ध खारंग जलाशय और महासमुंद जिले का कोडार बांध पूरी तरह से 100 फीसदी भर चुके हैं। कोडार बांध में पिछले एक महीने के दौरान जलस्तर में तेजी से सुधार हुआ और लंबे अरसे बाद यह पूर्ण क्षमता पर पहुंच गया है।

  • रविशंकर और गंगरेल जलाशय: धमतरी जिले के रविशंकर (गंगरेल) जलाशय में भी जलभराव 90 फीसदी से अधिक हो गया है, और पानी बढ़ने के कारण यहाँ से अतिरिक्त पानी की निकासी भी की गई है। पिछले एक माह में अकेले गंगरेल जलाशय के जलस्तर में करीब 23 फीसदी की वृद्धि हुई है।

प्रमुख बांधों और जलाशयों में जलभराव के आंकड़े (31 जुलाई बनाम 30 अगस्त)

जलाशय / बांध का नाम 31 जुलाई की स्थिति 30 अगस्त की स्थिति
मिनीमाता बांगो 83.35% 90.78%
गंगरेल जलाशय 67.82% 90.72%
तांदुला जलाशय 66.58% 78.73%
दुधावा 93.59% 82.37%
सिकासार 93.97% 81.43%
खारंग जलाशय 100% 100%
सोंदूर 68.77% 84.56%
मुरुमसिल्ली 84.33% 98.82%
कोडार बांध 87.90% 100%
मनियारी जलाशय 100% 100%
केलो बांध 40.45% 37.03%
अरपा भैंसाझार 25.14% 37.42%

मध्यम और लघु जलाशयों का हाल

प्रदेश के अधिकांश मध्यम और लघु आकारों के जलाशयों में भी पानी का स्तर तेजी से ऊपर उठा है। राजनांदगांव जिले का मोंगरा बैराज इसका एक बेहतरीन उदाहरण है, जहाँ 22 जुलाई तक जलस्तर लगभग शून्य के करीब था, लेकिन महज आठ दिनों के भीतर यह बढ़कर 76 फीसदी तक जा पहुँचा। अधिकांश मध्यम और लघु जलाशयों में 70 से 99 प्रतिशत तक पानी भर चुका है। हालाँकि, कांकेर जिले का मायना जलाशय और रायगढ़ जिले का किंकारीनाला अभी भी 50 फीसदी जलभराव के मुकाम तक नहीं पहुँच पाए हैं।

जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस बार की झमाझम बारिश से न केवल मौजूदा जल संकट की आशंका पूरी तरह टल गई है, बल्कि आने वाले वर्ष के लिए भी पर्याप्त मात्रा में जल सुरक्षित रहने की उम्मीद काफी मजबूत हो गई है।