मौसम में उतार-चढ़ाव के साथ ही बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग फ्लू जैसे लक्षण दिखते ही बिना किसी डॉक्टर की सलाह के खुद ही दवाइयां खाना शुरू कर देते हैं। खासतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर लोगों में यह आम गलतफहमी है कि इनके सेवन से फ्लू तुरंत ठीक हो जाता है, जबकि ऐसा करना सेहत के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।
स्वाइन फ्लू क्या है और यह कैसे फैलता है?
वर्तमान में दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। यह इन्फ्लुएंजा वायरस के कारण होने वाला एक संक्रामक श्वसन संक्रमण है। यह मुख्य रूप से किसी संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने के दौरान निकलने वाली बूंदों से फैलता है। इस संक्रमण की चपेट में आने पर ज्यादातर लोगों में सामान्य फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए यह गंभीर रूप भी ले सकता है।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण कौन से हैं?
स्वाइन फ्लू के लक्षण अक्सर अचानक से प्रकट होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से ये शामिल हैं:
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तेज बुखार और ठंड लगना
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लगातार खांसी और गले में खराश
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सिरदर्द तथा शरीर व मांसपेशियों में तेज दर्द
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अत्यधिक थकान, कमजोरी और बेचैनी
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नाक बहना या बंद रहना
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कुछ मामलों में उल्टी या मिचली आना (ध्यान रहे कि हर मरीज में ये सभी लक्षण एक साथ दिखाई दें, यह आवश्यक नहीं है।)
फ्लू में खुद से एंटीबायोटिक लेना क्यों है भारी भूल?
विशेषज्ञों के अनुसार, स्वाइन फ्लू एक वायरल संक्रमण है, जबकि एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल केवल बैक्टीरियल (बैक्टीरिया से होने वाले) संक्रमण के इलाज के लिए किया जाता है। इसलिए वायरल फ्लू होने पर खुद से एंटीबायोटिक खाने का कोई फायदा नहीं होता।
बिना डॉक्टर की सलाह या जरूरत के एंटीबायोटिक लेने से शरीर में 'एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस' (दवाइयों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होना) का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसका परिणाम यह होता है कि भविष्य में जब वास्तव में किसी बैक्टीरियल संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक की आवश्यकता पड़ती है, तब वे दवाइयां शरीर पर असर करना बंद कर देती हैं। इसलिए बिना चिकित्सीय परामर्श के कोई भी दवा लेने से बचना चाहिए।
स्वाइन फ्लू का सही उपचार और प्रबंधन
स्वाइन फ्लू का उपचार मरीज की उम्र, समग्र स्वास्थ्य और लक्षणों की गंभीरता को ध्यान में रखकर किया जाता है। हल्के लक्षणों वाले मरीजों को पर्याप्त आराम करने और शरीर में पानी की कमी न होने देने (हाइड्रेटेड रहने) की सलाह दी जाती है। बुखार या बदन दर्द जैसी तकलीफों के लिए डॉक्टर की सलाह से दवा ली जा सकती है, जबकि गंभीर मामलों में डॉक्टर एंटीवायरल दवाएं लिखने का निर्णय लेते हैं।
किन लोगों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है?
कुछ विशेष वर्गों के लोगों में फ्लू के गंभीर रूप लेने का जोखिम अधिक होता है, जिनमें शामिल हैं:
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छोटे बच्चे और बुजुर्ग
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गर्भवती महिलाएं
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कमजोर इम्युनिटी (प्रतिरोधक क्षमता) वाले लोग
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किसी पुरानी या गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति इन श्रेणियों के लोगों में फ्लू के कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
यदि बुखार और खांसी के साथ-साथ सांस लेने में कठिनाई, सीने में तेज दर्द, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, या मरीज की हालत लगातार बिगड़ती जाए, तो बिना देर किए तुरंत चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिए।
स्वाइन फ्लू से बचाव के जरूरी उपाय
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अपने हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं।
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खांसते या छींकते समय हमेशा अपने मुंह और नाक को रुमाल या टिशू पेपर से ढकें।
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किसी भी संक्रमित व्यक्ति के बहुत ज्यादा नजदीक जाने से बचें।
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यदि आप खुद बीमार महसूस कर रहे हैं, तो भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें ताकि दूसरों में संक्रमण न फैले।

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