नई दिल्ली। देश भर में चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी निर्माण कार्यों के स्तर पर नाराजगी जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रशासनिक अफसरों को जमकर फटकार लगाई है। उन्होंने केंद्र और राज्यों के शीर्ष अधिकारियों से सीधे सवाल दागा कि क्या मौजूदा जांच व्यवस्थाएं नाकाफी हो चुकी हैं, जो अब हमें चौथे पक्ष (फोर्थ पार्टी) से गुणवत्ता की जांच करानी पड़े?
थर्ड-पार्टी ऑडिट की पोल खुली
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता जांचने के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट की व्यवस्था तो लागू है, लेकिन यह अपने मकसद में नाकाम साबित हो रही है। प्रगति बैठक के दौरान उन्होंने दोटूक शब्दों में नौकरशाहों को चेताया कि काम में ऐसी लापरवाही बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह ढर्रा अब आगे नहीं चलेगा।
30,000 करोड़ की 6 बड़ी योजनाओं की समीक्षा
समीक्षा बैठक के दौरान पीएम ने रेल, सड़क और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी 6 विशाल परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। नौ राज्यों में फैली इन योजनाओं की लागत 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि बुनियादी ढांचे के कामों को टुकड़ों में देखने के बजाय एक संपूर्ण एकीकृत व्यवस्था (इंटीग्रेटेड सिस्टम) के रूप में मॉनिटर किया जाना चाहिए।
काम की रफ्तार और गुणवत्ता पर सख्त निर्देश
ऊर्जा क्षेत्र की एक परियोजना का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पर्याप्त ट्रांसमिशन नेटवर्क के बिना सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ाना वैसा ही है जैसे बिना नहरों के बांध बना देना। पीएमओ के अनुसार, उन्होंने सभी मंत्रालयों और राज्यों को हिदायत दी है कि वे अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करें और रफ्तार के साथ-साथ गुणवत्ता की निगरानी प्रणाली को हर स्तर पर मजबूत बनाएं।

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