वॉशिंगटन/बीजिंग: चीन द्वारा अंतरिक्ष के क्षेत्र में तेजी से किए जा रहे पुनरुपयोगी (रीयूजेबल) रॉकेट परीक्षणों ने अमेरिका और भारत समेत दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है। हाल ही में चीन की निजी एयरोस्पेस कंपनी 'लैंडस्पेस' ने अपने 'ज़ुक-3' रॉकेट बूस्टर की जमीन पर सटीक लैंडिंग कराई। इससे पहले चीनी सरकारी एजेंसी ने समुद्र में स्थापित प्लेटफॉर्म पर 'लॉन्ग मार्च 10बी' के बूस्टर को सुरक्षित रिकवर करने में सफलता पाई थी। विशेषज्ञ इन नागरिक परीक्षणों के पीछे चीनी सेना (PLA) की एक बेहद आक्रामक और खतरनाक सामरिक रणनीति देख रहे हैं।
स्पेस में रीयूजेबल तकनीक से बढ़ेगी चीनी 'किल चेन' क्षमता
अंतरिक्ष आधारित सैन्य अभियानों में 'किल चेन' वह एकीकृत डिजिटल प्रणाली है, जो सैटेलाइट्स के जरिए दुश्मन की लोकेशन खोजती है, उस पर 24 घंटे नजर रखती है और जीपीएस निर्देशांकों के जरिए मिसाइल हमलों को सटीक निशाना बनाने में मदद करती है। चीनी सेना को इस नई पुनरुपयोगी रॉकेट तकनीक से तीन बड़े युद्धक फायदे मिलेंगे:
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तत्काल बैकअप और रीप्लेसमेंट: युद्ध की स्थिति में यदि दुश्मन चीन के जासूसी उपग्रहों को नष्ट करता है, तो चीन कुछ ही घंटों के भीतर नए सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में स्थापित कर अपनी क्षमता तुरंत बहाल कर सकेगा।
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लॉन्चिंग लागत में भारी कमी: रीयूजेबल रॉकेट तकनीक से उपग्रह भेजने का खर्च 70 से 80 प्रतिशत तक घट जाता है। इससे चीन किफायती दरों पर सैकड़ों निगरानी उपग्रहों का एक अभेद्य जाल अंतरिक्ष में बिछा सकता है।
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इंडो-पैसिफिक और ताइवान क्षेत्र में बढ़त: इस रियल-टाइम निगरानी क्षमता से चीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर्स और युद्धपोतों की सटीक लोकेशन ट्रैक कर अपनी अत्याधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों से उन्हें आसानी से निशाना बना सकेगा।
पेंटागन ने जताई गहरी चिंता
चीनी अंतरिक्ष गतिविधियों पर नजर रख रहे अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने इस विकासक्रम को गंभीर खतरा करार दिया है। अमेरिकी स्पेस ऑपरेशन्स के वरिष्ठ अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि चीन की यह आधुनिक 'किल चेन' प्रणाली हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना और उसके बॉम्बर्स की गतिविधियों को आसानी से ट्रैक कर सकती है। बीते 'तालिसमान सेबर' सैन्य अभ्यास के दौरान चीन ने अपने लगभग 300 उपग्रहों की मदद से 3,000 से अधिक परिक्रमाएं कर अमेरिकी व सहयोगी सेनाओं की गुप्त गतिविधियों पर नजर रखी थी, जो उसकी बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

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