लखनऊ। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के अध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। हाल ही में अखिलेश यादव द्वारा दिए गए 'चवन्नी' वाले बयान के बाद दोनों पूर्व सहयोगियों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बनने की बात खुलकर सामने आ गई है।
अखिलेश यादव का कटाक्ष
अखिलेश यादव ने हाल ही में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गठबंधन की राजनीति पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि जब उन्होंने 'चवन्नी' को रुपया बना दिया था, तब भी लोग उन्हें छोड़कर चले गए। हालांकि उन्होंने किसी का सीधा नाम नहीं लिया था, लेकिन इस टिप्पणी को 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के संदर्भ में जयंत चौधरी से जोड़कर देखा गया, जब रालोद ने भाजपा के साथ जाने के बजाय सपा के साथ गठबंधन किया था।
जयंत चौधरी का पलटवार
रालोद अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यदि सस्ते शब्दों का इस्तेमाल करना ही था, तो कम से कम उनका नाम लेकर कहा जाना चाहिए था। उन्होंने जाट समुदाय को निशाना बनाए जाने और अहंकार को पतन का कारण बताया।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं
इस विवाद पर अन्य दलों के नेताओं ने भी तीखे तेवर दिखाए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और रालोद नेता अनिल कुमार ने इस बयान को किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह की विचारधारा और किसान समुदाय का अपमान करार दिया है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी इस मामले में कूदते हुए अखिलेश यादव से माफी की मांग की है।

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