August 15, 2026

2 साल से बंद पड़ा है बैंक अकाउंट? जानें पैसा सुरक्षित रहेगा या नहीं

अगर आपका कोई बैंक अकाउंट ऐसा है जिसे आपने सालों से इस्तेमाल नहीं किया है, तो हो सकता है कि वह निष्क्रिय (Inactive) हो चुका हो। ऐसे खातों पर समय पर ध्यान न देने से फ्रॉड की गुंजाइश बढ़ जाती है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, यदि किसी खाते से लगातार 2 साल (24 महीने) तक ग्राहक की ओर से कोई लेन-देन (डेबिट या क्रेडिट) नहीं होता, तो बैंक उस अकाउंट को इनएक्टिव या डॉर्मेंट श्रेणी में डाल देते हैं। हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आपका पैसा डूब गया; आप आसान प्रक्रिया अपनाकर अपने पैसे और खाते दोनों को वापस पा सकते हैं।

इनएक्टिव अकाउंट से होने वाले बड़े नुकसान

खाता इनएक्टिव होने पर सामान्य तरीके से पैसे निकालने या डिजिटल ट्रांजैक्शन करने पर रोक लग जाती है। इसके अलावा, वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार:

  • मनी म्यूल और फ्रॉड का खतरा: 'चॉइस वेल्थ' के सीईओ अतीश जैन के अनुसार, डॉर्मेंट बैंक अकाउंट भारत के बैंकिंग सिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती बन रहे हैं। निगरानी न होने के कारण ये खाते जालसाजों (Money Mules) के आसान निशाने पर आ जाते हैं।

  • अपडेटेड जानकारी की कमी: लंबे समय तक खाते का इस्तेमाल न करने से मोबाइल नंबर, ईमेल और केवाईसी (KYC) से जुड़ी जानकारी पुरानी हो जाती है। ऐसे में यदि खाते में कोई संदिग्ध गतिविधि होती है, तो खाताधारक को तुरंत नोटिफिकेशन नहीं मिल पाता।

खाता दोबारा एक्टिव कराने और पैसे पाने का तरीका

RBI के स्पष्ट निर्देश हैं कि खाते में जमा पैसा हमेशा खाताधारक का ही रहता है। अकाउंट को दोबारा चालू करने के लिए आपको निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:

  • बैंक शाखा में संपर्क: अपने बैंक की नजदीकी शाखा में जाकर अकाउंट को री-एक्टिवेट कराने के लिए आवेदन दें।

  • KYC अपडेट: आपको अपने पहचान पत्र, पते के प्रमाण और हालिया फोटो के साथ री-केवाईसी (Re-KYC) प्रक्रिया पूरी करनी होगी। कई बैंक अब यह सुविधा 'वीडियो केवाईसी' (Video KYC) के जरिए ऑनलाइन भी प्रदान कर रहे हैं।

  • नया लेन-देन: केवाईसी अपडेट होने और बैंक की मंजूरी मिलने के बाद, खाते से एक छोटा लेन-देन करके उसे पूरी तरह एक्टिव किया जा सकता है।

नौकरी बदलने वालों को ध्यान देने की सलाह

अक्सर देखा जाता है कि लोग नौकरी बदलते समय नई कंपनी में नया सैलरी अकाउंट खुलवा लेते हैं और पुरानी कंपनी के बैंक अकाउंट को ऐसे ही छोड़ देते हैं। इसके अलावा, एक से अधिक बैंक खाते रखने वाले लोगों के साथ भी ऐसा होता है।

वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि जिन खातों का उपयोग न हो, उन्हें या तो नियमित रूप से थोड़ा-बहुत इस्तेमाल करते रहें या फिर बैंक जाकर औपचारिक रूप से बंद करवा दें, ताकि किसी भी तरह के संभावित वित्तीय नुकसान या साइबर फ्रॉड से बचा जा सके।