नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एनडीए सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में गठबंधन के घटक दलों के अलावा तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए बागी सांसदों को भी निमंत्रण भेजा गया था। यद्यपि बैठक में अधिकांश नेता उपस्थित रहे, लेकिन तीन प्रमुख सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
संसद भवन में मौजूद रहकर भी बैठक से किनारा
सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी से अलग गुट में शामिल सांसद यूसुफ पठान, अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान बैठक वाले दिन संसद परिसर में ही मौजूद थे, फिर भी उन्होंने इस कार्यक्रम में भाग नहीं लिया। केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी इन तीनों नेताओं के गैरमौजूद रहने की बात स्वीकार की है। बिना किसी पूर्व जानकारी के इस तरह दूरी बनाए रखने को एनडीए के साथ उनके समीकरणों में खटास के रूप में देखा जा रहा है।
टीएमसी में दोबारा शामिल होने की सुगबुगाहट
राजनीतिक घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए टीएमसी के दिग्गज नेता और सांसद सौगत रॉय ने दावा किया है कि ये तीनों बागी सांसद एनडीए की नीतियों और माहौल में खुद को ढाल नहीं पा रहे हैं। उनके अनुसार, ये नेता अब वापस अपनी पुरानी पार्टी में लौटने के रास्ते तलाश रहे हैं। रॉय ने स्पष्ट किया कि यदि वे वापसी चाहते हैं, तो उन्हें औपचारिक प्रक्रिया का पालन करते हुए आवेदन देना होगा, जिस पर अंतिम फैसला टीएमसी नेतृत्व ही करेगा।
दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता की मांग
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस ने इन बागी सांसदों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन्हें तुरंत अयोग्य ठहराने का अनुरोध किया है। टीएमसी नेताओं ने केंद्र सरकार पर सरकारी तंत्र और संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल कर क्षेत्रीय दलों में फूट डालने का आरोप लगाया है, जिसको लेकर संसद परिसर से लेकर कोलकाता की सड़कों तक विरोध जताया जा रहा है।

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