चीनी-चावल महंगे होने से बढ़ी चिंता, जानिए कीमतों में उछाल की असली वजह

नई दिल्ली: कमजोर मानसून, वैश्विक संकट और जमाखोरी के चलते देश में त्योहारी सीजन की आहट के साथ ही खाद्य पदार्थों के दामों में तेजी दर्ज की गई है। पिछले एक महीने के भीतर ही चीनी और चावल की कीमतों में पांच प्रतिशत तक की वृद्धि देखने को मिली है, जिससे आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

चीनी और चावल के खुदरा दामों में इजाफा

उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में चीनी की थोक कीमत बढ़कर औसतन 4,593 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है, जबकि खुदरा बाजार में दाम बढ़कर 49.53 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गए हैं। इसके अलावा, चावल की औसत दैनिक खुदरा कीमत भी बढ़कर 45.13 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है, विशेषकर दक्षिण भारत के राज्यों में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

दामों में बढ़ोतरी के पीछे प्रमुख कारण

खाद्य सामग्रियों के महंगे होने के पीछे उत्पादक राज्यों में पुराने स्टॉक का खत्म होना, इथेनॉल की ओर रुझान और जमाखोरी मुख्य वजहें हैं। इसके अलावा, अल-नीनो के कारण उपजी मौसमी स्थितियों और बारिश की कमी ने कृषि उत्पादन को प्रभावित किया है, जिसका फायदा उठाकर सट्टेबाजों ने कीमतें बढ़ा दी हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तांबा भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर

केवल खाद्य वस्तुएं ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में तांबे का तीन महीने का वायदा अनुबंध भी चढ़कर 13,842 डॉलर प्रति टन की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। प्रमुख उत्पादक देशों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण खदानों में कामकाज ठप होने और तकनीकी क्षेत्रों से मांग बढ़ने के कारण आने वाले दिनों में इलेक्ट्रॉनिक और घरेलू उपकरण भी महंगे हो सकते हैं।