फरीदाबाद: अदालत ने एक दुष्कर्म के मामले में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। कोर्ट ने होटलों के एंट्री रजिस्टर में युवती के खुद हस्ताक्षर करने को आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाने का अहम सबूत माना। इसके साथ ही, अदालत के समक्ष अपने पूर्व बयानों से मुकरने पर शिकायतकर्ता युवती के खिलाफ झूठी गवाही (पेरजुरी) की अलग से कार्रवाई शुरू करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम कुमार की अदालत में यह मामला वर्ष 2019 से लंबित था।
इंस्टाग्राम से हुई थी दोस्ती और शादी का झांसा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2019 में पीड़िता की नोएडा निवासी अंकित से इंस्टाग्राम के जरिए पहचान हुई थी। युवती ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसे विभिन्न स्थानों और होटलों में ले जाकर दुष्कर्म किया। शिकायत के आधार पर महिला थाना बल्लभगढ़ में मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान पीड़िता अदालत में अपने शुरुआती बयानों से पलट गई और स्वीकार किया कि दोनों के बीच प्रेम संबंध थे, शारीरिक संबंध सहमति से बने थे और आरोपी ने कभी शादी का वादा नहीं किया था।
होटल रजिस्टर के हस्ताक्षर और कॉल रिकॉर्ड बने मुख्य आधार
अदालत ने अपने फैसले में होटल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल (CDR) को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। कोर्ट ने टिप्पणी की कि दोनों लंबे समय तक संपर्क में थे और विभिन्न होटलों में साथ ठहरे। युवती ने अपनी मर्जी से पहचान पत्र देकर रजिस्टर में हस्ताक्षर किए थे और किसी भी होटल स्टाफ से कभी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई, जो उनके बीच सहमति से बने संबंधों को दर्शाता है।
मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्यों का अभाव
फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि मेडिकल साक्ष्य दुष्कर्म के आरोपों की पुष्टि नहीं करते हैं। पीड़िता के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं पाया गया। घटना पुरानी होने की वजह से कोई फॉरेंसिक नमूना या वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सका, जिससे जबरदस्ती या किसी प्रकार के दबाव की पुष्टि होती हो।

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