पुणे: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पुणे में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। तिलक स्मारक ट्रस्ट के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनकी असाधारण सेवाओं और देश के रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखने में उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उन्हें इस सम्मान के लिए चुना गया है। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार और समारोह से जुड़ी विस्तृत कवरेज के लिए पाठक अमर उजाला के डिजिटल पोर्टल पर जा सकते हैं।
अजीत डोभाल का राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान
81 वर्षीय अजीत डोभाल ने अपने लंबे और प्रतिष्ठित करियर के दौरान मिजोरम, सिक्किम, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कई चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है। इसके अलावा उन्होंने इस्लामाबाद और लंदन स्थित भारतीय राजनयिक मिशनों में भी अपनी सेवाएं दी हैं और वह भारत-चीन सीमा वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधि की भूमिका भी निभा चुके हैं। डोकलाम गतिरोध जैसे गंभीर कूटनीतिक संकटों को सुलझाने में उनकी निर्णायक भूमिका रही है। इस तरह के विशिष्ट घटनाक्रमों की लाइव अपडेट्स के लिए लोग एनडीटीवी की वेबसाइट की मदद ले सकते हैं।
लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार का गौरवशाली इतिहास और परंपरा
तिलक स्मारक ट्रस्ट द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1983 में की गई थी, जिसके तहत सबसे पहला सम्मान प्रख्यात समाजवादी नेता एस. एम. जोशी को प्रदान किया गया था। यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष 1 अगस्त को स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि के अवसर पर उन असाधारण व्यक्तित्वों को दिया जाता है, जिन्होंने राष्ट्र की प्रगति, अखंडता और विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। इस ऐतिहासिक पुरस्कार के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए नागरिक दैनिक जागरण के समाचार प्लेटफॉर्म का अवलोकन कर सकते हैं।
अमित शाह द्वारा महान समाज सुधारक अण्णाभाऊ साठे को श्रद्धांजलि
अपने पुणे दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महान मराठी लोकशाहीर, कवि और प्रसिद्ध समाज सुधारक अण्णाभाऊ साठे की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सरसबाग क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के कई दिग्गज नेता और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिन्होंने अण्णाभाऊ साठे की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके योगदान को याद किया। इस प्रकार की सामाजिक और सांस्कृतिक खबरों की विस्तृत जानकारी के लिए पाठक हिन्दुस्तान के डिजिटल संस्करण का उपयोग कर सकते हैं।

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