HDFC बैंक पर MSRDC मामले का असर, बाजार खुलते ही शेयर फिसला

मुंबई — सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार की सुबह शेयर बाजार में उस वक्त सुस्ती देखने को मिली जब देश के दिग्गज प्राइवेट सेक्टर के एचटीएफसी बैंक के शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। बैंक की तरफ से आधिकारिक रूप से यह जानकारी साझा की गई है कि महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम यानी एमएसआरडीसी के साथ हुए पुराने समझौतों के संदर्भ में आंतरिक स्तर पर एक व्यापक समीक्षा की गई। इस समीक्षा के बाद बैंक के निदेशक मंडल ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशिधर जगदीशन, मुख्य वित्तीय अधिकारी श्रीनिवासन वैद्यनाथन और खुदकुर्मी परिसंपत्तियों के समूह प्रमुख अरविंद वोहरा के ऊपर आर्थिक जुर्माना लगाने का बड़ा फैसला किया है। इस खबर के सामने आने के बाद निवेशकों की नजरें इस बैंकिंग शेयर पर टिकी हुई हैं और फिलहाल नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर यह स्टॉक मामूली गिरावट के साथ कारोबार करता हुआ नजर आ रहा है।

शीर्ष प्रबंधन पर बोर्ड का बड़ा जुर्माना और चेतावनी

निदेशक मंडल की अनुशंसा के आधार पर बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि एमडी एवं सीईओ शशिधर जगदीशन, सीएफओ श्रीनिवासन वैद्यनाथन और ग्रुप हेड अरविंद वोहरा में से प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना ठोका गया है। यह पूरा घटनाक्रम मुख्य रूप से वर्ष 2017 से लेकर 2021 के दौरान भारी-भरकम डिपाजिट जुटाने के सिलसिले में एमएसआरडीसी के साथ किए गए करारों की इंटरनल रीव्यू से जुड़ा हुआ है। बैंक ने स्टॉक एक्सचेंजों को जो आधिकारिक सूचना भेजी है, उसके अनुसार यह दंडात्मक कार्रवाई नियमों के दायरे से बाहर जाकर किए गए कामकाज यानी बिजनेस ओवररीच के चलते की गई है, हालांकि बैंक ने यह भी साफ किया है कि इसके पीछे किसी भी अधिकारी का कोई दुर्भावनापूर्ण या निजी स्वार्थ वाला उद्देश्य नहीं था।

स्वतंत्र समिति की जांच और आरबीआई को दी गई जानकारी

बैंक के भीतर गठित स्वतंत्र निदेशकों की एक विशेष अनुशासन समिति की बैठक में इस पूरे प्रकरण की गहन छानबीन की गई। इस उच्चस्तरीय जांच के दौरान बोर्ड को ऐसा कोई भी ठोस साक्ष्य या सबूत हाथ नहीं लगा जिससे यह साबित हो सके कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार की व्यक्तिगत वित्तीय लाभ कमाने की मंशा शामिल थी। इसके बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक के मौजूदा दिशा-निर्देशों के तकनीकी अनुपालन को सर्वोपरि रखते हुए बोर्ड ने शीर्ष स्तर के तीनों प्रमुख अधिकारियों को औपचारिक चेतावनी पत्र जारी करने के साथ-साथ एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने का यह कड़ा कदम उठाया है। बैंक के प्रबंध तंत्र ने इस पूरे मामले से जुड़ी तमाम रिपोर्ट और उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक को भी आधिकारिक रूप से सौंप दी है।

मई महीने की मीडिया रिपोर्ट्स और मार्केटिंग खर्च का विवाद

इस ताजा कार्रवाई की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो इसी साल मई के महीने में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह गंभीर आरोप उछाले गए थे कि एचडीएफसी बैंक ने भारी मात्रा में डिपॉजिट हासिल करने के एवज में एमएसआरडीसी को लगभग 45 करोड़ रुपये का भारी-भरकम भुगतान किया था। उन रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया था कि इन तमाम भुगतानों को कंपनी की बैलेंस शीट में मार्केटिंग और विज्ञापनों के खर्च के तौर पर दिखाया गया था और इस पूरे वाकये की जानकारी शीर्ष नेतृत्व को भी थी। हालांकि, बैंक प्रबंधन ने शुरुआत से ही इन तमाम अनियमितताओं के आरोपों को सिरे से खारिज किया था और यह दलील दी थी कि उनके यहां आंतरिक निगरानी, ऑडिट और नियंत्रण की बेहद मजबूत व्यवस्था है तथा सभी वित्तीय मामलों का निपटारा पूरी पारदर्शिता के साथ तय विधिक नियमों के अनुरूप किया जाता है।

कानूनी जांच और कॉरपोरेट गवर्नेंस की स्थिति

इस घटनाक्रम से पहले भी इस बड़े निजी बैंक में कॉरपोरेट गवर्नेंस और व्यावसायिक नैतिकता के विभिन्न पहलुओं को लेकर एक स्वतंत्र कानूनी जांच कराई जा चुकी है। उस दौरान बैंक के पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती की ओर से कामकाज की शुचिता और व्यवस्था को लेकर कुछेक सवाल खड़े किए गए थे, लेकिन स्वतंत्र कानूनी जांच के दौरान उन तमाम आशंकाओं या आरोपों के समर्थन में कोई भी पुख्ता प्रमाण नहीं मिल पाया था। बैंक का प्रबंधन लगातार यह कहता आया है कि वे अपने निवेशकों और नियामक संस्थाओं के प्रति पूरी तरह जवाबदेह हैं और संस्थागत सुचिता को बनाए रखने के लिए इस तरह के आंतरिक सुधारात्मक कदम उठाए जाना कॉरपोरेट अनुशासन का एक स्वाभाविक और आवश्यक हिस्सा है।