चंडीगढ़: पंजाब की राजनीतिक गलियारों में इन दिनों स्कूली परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और कथित पेपर लीक के गंभीर मुद्दों को लेकर जबरदस्त सियासी घमासान मचा हुआ है। विपक्षी दलों और खास तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा राज्य सरकार पर लगातार लगाए जा रहे पेपर लीक के तमाम गंभीर आरोपों का जवाब देने के लिए अब आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और वरिष्ठ नेता अरविंद केजरीवाल खुद मैदान में उतर आए हैं। एक तीखे पलटवार में केजरीवाल ने भाजपा के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी राजनीतिक हताशा और विफलता का प्रत्यक्ष परिणाम बताया है।
'पंजाब को शिक्षा के क्षेत्र में नंबर वन बनाया, विरोधियों से यह सफलता पच नहीं रही'
प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक मंचों के जरिए अपनी बात रखते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब पंजाब में हमारी पार्टी की सरकार सत्ता में आई थी, तब देश के अन्य राज्यों के मुकाबले शिक्षा के मामले में पंजाब काफी पिछड़कर 27वें पायदान पर खड़ा था।
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हमारी सरकार ने सत्ता संभालते ही शिक्षा व्यवस्था को सुधारने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया।
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दिन-रात कड़ी मेहनत करके, प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक सुधार लाकर और सरकारी स्कूलों का कायाकल्प करके आज हमने पंजाब को शिक्षा के मामले में देश में नंबर वन की स्थिति पर ला खड़ा किया है।
केजरीवाल ने भाजपा पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि विपक्षी दलों और खासकर भाजपा से आम आदमी पार्टी सरकार के ये शानदार और ऐतिहासिक काम बिल्कुल पच नहीं रहे हैं। यही वजह है कि वे जानबूझकर हमारी सरकार की इस बेहतरीन उपलब्धि और साफ-सुथरे रिकॉर्ड पर झूठे आरोप लगाकर कलंक लगाने की घटिया कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष का आक्रामक रुख और सियासी घेराबंदी
दूसरी ओर, पंजाब में विपक्षी दलों का दावा है कि हालिया परीक्षाओं के दौरान व्यवस्था में खामियों के चलते छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। भाजपा और अन्य विरोधी पार्टियों का आरोप है कि पंजाब में प्रशासनिक लापरवाही के कारण शिक्षा प्रणाली चरमरा गई है और पेपर लीक की घटनाओं से युवाओं में भारी निराशा है। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय और आगामी चुनौतियां
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब में आने वाले दिनों में शिक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता का मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है। एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी अपनी शिक्षा क्रांति के मॉडल को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती है, वहीं विपक्ष इसी मोर्चे पर सरकार को घेरकर सियासी जमीन मजबूत करने की फिराक में है। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या सरकार विपक्ष के इन तीखे हमलों का जवाब जमीनी आंकड़ों के साथ मजबूती से दे पाती है या फिर यह विवाद पंजाब की राजनीति का एक बड़ा केंद्र बिंदु बनकर और अधिक गहराता है।

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