समस्तीपुर: आगामी नागपंचमी के पावन पर्व के मद्देनजर समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर प्रखंड क्षेत्र में वन्यजीवों के अवैध संरक्षण और प्रदर्शन को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा एक व्यापक और सख्त अभियान चलाया गया है। जिलाधिकारी के निर्देशों का पालन करते हुए वन विभाग, अनुमंडल प्रशासन और स्थानीय पुलिस के संयुक्त दलों ने संदिग्ध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान विभिन्न बर्तनों और गुप्त स्थानों पर कथित रूप से कैद करके रखे गए दर्जनों सांपों को सुरक्षित बाहर निकालकर उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त कर दिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि धार्मिक आस्था की आड़ में संरक्षित वन्यजीवों को पकड़ना, कैद करना या उनका सार्वजनिक प्रदर्शन करना कानूनन अपराध है और ऐसा करने वालों पर बिना किसी ढील के सीधे कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी और दबिश
पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों द्वारा नागपंचमी के अवसर पर सांपों के बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की आशंका जताए जाने के बाद यह प्रशासनिक कदम उठाया गया है। प्राप्त शिकायतों और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर प्रशासन ने सिंघियाघाट, नरहन, आलमपुर कोदरिया, माधोपुर, महावीर गाछी, मुरिया स्थान, मिश्रौलिया, खदियाही, गंगौली पुल और देसरी समेत बूढ़ी गंडक नदी के तटीय इलाकों में विशेष चौकसी बरतनी शुरू कर दी है। इन पारंपरिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में सपेरों के संभावित अड्डों पर लगातार दबिश दी जा रही है ताकि किसी भी वन्यजीव को प्रताड़ित होने से बचाया जा सके।
लवनी और घड़ों में क्रूरतापूर्वक रखे जाते थे वन्यजीव
वन्यजीव सरंक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं का आरोप है कि नागपंचमी के कई दिन पूर्व से ही खेतों, झाड़ियों और जंगलों से कोबरा, करैत, धामन जैसी जहरीली व अन्य प्रजातियों के सांपों को पकड़ लिया जाता है। इसके बाद उन्हें लवनी, मिट्टी के घड़ों, प्लास्टिक के डिब्बों, टीन के बक्से और बोरियों में बंद करके रखा जाता है, जिससे मेलों और उत्सवों के दौरान उनका इस्तेमाल किया जा सके। अधिकारियों ने यह भी रेखांकित किया है कि करतब दिखाने के नाम पर सांपों के दांत तोड़ना, उनके विष ग्रंथियों को नुकसान पहुंचाना, मुंह सी देना या जबरन दूध पिलाना जैसे कृत्य अत्यंत क्रूर और अमानवीय हैं, जिन्हें किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कानूनी शिकंजा और सात साल तक की कड़ी सजा का प्रावधान
प्रशासनिक और वन विभाग की कार्रवाई के दायरे में लगभग एक दर्जन सपेरे आ चुके हैं, जिन्हें विशेष निगरानी सूची में रखा गया है और नागपंचमी के पर्व तक उन पर कड़ी नजर रखी जाएगी। भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों का हवाला देते हुए विभाग ने स्पष्ट किया है कि सांपों को पकड़ना, कैद करना या उनका प्रदर्शन करना एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। ऐसे मामलों में सीधे प्राथमिकी दर्ज की जाती है, और अदालत में दोष साबित होने पर दोषियों को तीन से सात वर्ष तक की कैद तथा भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
आस्था और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का संदेश
प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे आस्था के नाम पर किसी भी प्रकार के वन्यजीव शोषण को बढ़ावा न दें। यदि किसी भी स्थान पर कोई सांप नजर आए, तो सपेरों को बुलाने के बजाय तुरंत वन विभाग, स्थानीय पुलिस या आपातकालीन सेवा को सूचित किया जाना चाहिए ताकि प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम सुरक्षित तरीके से उस जीव का बचाव कर सके। पिछले साल भी इसी क्षेत्र में इसी तरह की सख्त धाराओं के तहत कई लोगों के विरुद्ध गैर-जमानती मुकदमे दर्ज किए गए थे। जिला प्रशासन के इस संयुक्त अभियान ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि पर्व-त्योहारों पर आस्था का पूरा सम्मान किया जाएगा, लेकिन कानून के दायरे से खिलवाड़ और वन्यजीवों पर अत्याचार किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।

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