देवघर: भारत सरकार के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थान एम्स देवघर को झारखंड सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। एम्स देवघर चिकित्सा, अनुसंधान और स्वास्थ्य देखभाल के तीनों प्रमुख आयामों में पूरी तरह सक्षम है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने एम्स की विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ उठाकर राज्य के अन्य प्रमुख अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों का स्तर सुधारने के लिए यह ऐतिहासिक कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री मेंटरशिप योजना के तहत राज्य सरकार की बड़ी पहल
झारखंड सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक मजबूत, आधुनिक और अद्यतन बनाने के उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री मेंटरशिप योजना' की शुरुआत की है। इसी महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत एम्स देवघर को मेंटर संस्थान के रूप में चुना गया है। इस दूरदर्शी पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और जिला सदर अस्पतालों की कार्यप्रणाली में गुणात्मक सुधार लाना है ताकि दूर-दराज के मरीजों को भी अपने ही जिले में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
मेडिकल कॉलेजों और सदर अस्पतालों का होगा कायाकल्प
इस योजना के तहत संताल परगना और आसपास के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को एम्स देवघर का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इसमें दुमका मेडिकल कॉलेज और धनबाद मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ देवघर, गोड्डा तथा गिरिडीह के सदर अस्पताल विशेष रूप से शामिल हैं। एम्स की टीम इन अस्पतालों के डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और प्रशासनिक अधिकारियों को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों तथा प्रबंधन की विशेष ट्रेनिंग देकर वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ और अपडेट करेगी।
चिकित्सा और प्रशिक्षण के तीन मुख्य स्तंभों पर विशेष ध्यान
एम्स देवघर अपने तीन मूल स्तंभों—उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा, उच्चस्तरीय मेडिकल शिक्षा और आधुनिक अनुसंधान—के आधार पर इन लक्षित अस्पतालों में कार्य करेगा। इन शिक्षण और स्वास्थ्य संस्थानों में एम्स के विशेषज्ञ तीन प्रमुख क्षेत्रों में गहन प्रशिक्षण देंगे। इससे न केवल स्थानीय अस्पतालों में जटिल रोगों के इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी, बल्कि वहां के चिकित्सा कर्मियों की दक्षता और क्षमता में भी अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने से मरीजों को राहत
एम्स देवघर द्वारा मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिलने से इन पांचों बड़े अस्पतालों का माहौल पूरी तरह बदल जाएगा। इस नई व्यवस्था के लागू होने से दुमका, धनबाद, देवघर, गोड्डा और गिरिडीह जिलों के लाखों लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों या दूसरे राज्यों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। एम्स के अनुभव और आधुनिक दृष्टिकोण से लैस होकर ये अस्पताल अब स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज उपलब्ध कराने में सक्षम बनेंगे।

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