मेरठ: उत्तर प्रदेश के शामली जिले में गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए सरकार द्वारा चलाई जाने वाली महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना' में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस योजना का गलत लाभ उठाने के लिए कई शादीशुदा, अधेड़ उम्र की महिलाओं और यहां तक कि एक नाबालिग बालिका तक ने खुद को अविवाहित और बालिग बताकर आवेदन कर दिया। इन सभी आवेदनों में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और झूठे दस्तावेज लगाए गए थे।
समाज कल्याण विभाग और तहसील प्रशासन द्वारा किए गए संयुक्त सत्यापन के दौरान 115 से अधिक ऐसे फर्जी आवेदन पकड़े गए, जिन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। अब प्रशासन इस बात की गहन जांच कर रहा है कि इन फर्जी दस्तावेजों को तैयार कराने और अवैध आवेदन करवाने के पीछे किन-किन लोगों की संलिप्तता रही है।
फर्जीवाड़े के हैरान करने वाले मामले
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52 की उम्र में बनीं 21 साल की युवती: शामली ब्लॉक के खेड़ी गांव की रहने वाली 52 वर्षीय सोनिया ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर खुद को 21 साल की कुंवारी युवती दर्शाते हुए आवेदन कर दिया था। जब तहसील स्तर पर जमीनी सत्यापन हुआ, तो उसकी असली उम्र और वैवाहिक स्थिति की सच्चाई सामने आ गई, जिसके बाद उसका आवेदन तुरंत खारिज कर दिया गया।
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तीन बच्चों की मां बनीं अविवाहित: शामली के इस्सोपुर गांव की रहने वाली 37 वर्षीय गुलशाना ने योजना का अवैध लाभ उठाने के लिए खुद को अविवाहित घोषित किया। हालांकि, जांच में खुलासा हुआ कि वह पहले से शादीशुदा हैं और तीन बच्चों की मां हैं। सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर उनका आवेदन भी निरस्त कर दिया गया।
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40 साल की महिला ने छिपाई शादी: खुरगान गांव निवासी 40 वर्षीय रुकसाना ने भी आवेदन में अपनी शादी की बात छिपाते हुए खुद को कुंवारी बताया। प्रशासनिक जांच में उनके शादीशुदा होने की पुष्टि होने के बाद आवेदन को रद्द कर दिया गया।
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13 साल की नाबालिग को बनाया बालिग: कैराना क्षेत्र में एक 13 वर्षीय नाबालिग बालिका को बालिग दर्शाकर सामूहिक विवाह योजना के तहत गलत तरीके से आवेदन करवा दिया गया। दस्तावेजों की बारीक जांच के दौरान उसकी वास्तविक उम्र सामने आने पर इस आवेदन को भी तुरंत रोक दिया गया।
जिले में 506 जोड़ों का सामूहिक विवाह प्रस्तावित
प्रशासन के अनुसार, शामली जिले में इस बार मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कुल 506 जोड़ों का विवाह कराया जाना प्रस्तावित है। तय कार्यक्रमों के अनुसार:
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27 जुलाई को थानाभवन में 110 जोड़े,
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28 जुलाई को ऊन में 116 जोड़े, और
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30 जुलाई को शामली ब्लॉक में 118 जोड़े परिणय सूत्र में बंधेंगे। इसके अलावा कांधला और कैराना ब्लॉक के कार्यक्रमों की तिथियां भी जल्द ही घोषित की जाएंगी।
क्या है मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के नियम?
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के सुखी वैवाहिक जीवन के लिए शुरू की गई इस योजना के तहत सरकार प्रति जोड़े पर 1 लाख रुपये खर्च करती है।
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इसमें से 64,000 रुपये सीधे वधू के बैंक खाते में जमा किए जाते हैं,
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21,000 रुपये का गृहस्थी का जरूरी सामान दिया जाता है, और
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15,000 रुपये विवाह के आयोजन पर खर्च किए जाते हैं।
पात्रता: इस योजना का लाभ केवल उन्हीं युवतियों को मिलता है जो पात्र हों, अविवाहित हों और निर्धारित आयु सीमा पूरी करती हों। नियमानुसार शादी के समय वधू की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और वर की आयु कम से कम 21 वर्ष या उससे अधिक होनी अनिवार्य है।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई और बयान
इस पूरे मामले पर शामली के जिलाधिकारी आलोक यादव ने स्पष्ट किया है कि सामूहिक विवाह योजना के तहत वर्तमान में सघन सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। फर्जीवाड़ा करने वाले सभी लोगों के आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। साथ ही, इस अवैध कृत्य में शामिल और फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने वाले बिचौलियों व अन्य लोगों की भी पहचान कराई जा रही है, जिनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन के दौरान सामने आए इन तमाम अपात्र, शादीशुदा और नाबालिग आवेदनों को छांटकर बाहर कर दिया गया है, और अब यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योजना का लाभ केवल वास्तव में पात्र और जरूरतमंद परिवारों तक ही पहुंचे।

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