दंतेवाड़ा। कटेकल्याण विकासखंड के ग्राम पंचायत बड़े गुडरा (लेखपाल) के सरपंच दिनेश मरकाम को पद से बर्खास्त किए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर आक्रोश भड़क गया है। भारी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न पंचायतों के सरपंचों ने दंतेवाड़ा स्थित एसडीएम दफ्तर पहुंचकर इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। उन्होंने बर्खास्तगी के आदेश पर फिर से विचार करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा है।
सरपंच पर क्या हैं आरोप?
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, सरपंच दिनेश मरकाम पर शासकीय सील और हस्ताक्षरों के गलत इस्तेमाल का आरोप लगा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने कटेकल्याण के साप्ताहिक बाजार में बाहर से आने वाले व्यापारियों को व्यापार करने से रोकने की कोशिश की। इसके अलावा, उन्होंने सर्व आदिवासी समाज के लेटरपैड पर पंचायत की आधिकारिक सील लगाकर धरना-प्रदर्शन और रैली से जुड़े पत्र जारी किए, जिससे इलाके में कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया था।
प्रशासन ने कार्रवाई को ठहराया सही
एसडीएम लोकेश अल्मा ने इस मामले पर जानकारी देते हुए कहा कि यह मामला अप्रैल महीने से ही जांच के अधीन था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी पद और सील का उपयोग आंदोलन से जुड़े पत्रों में करना पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 का साफ उल्लंघन है। इसके साथ ही, बाहरी व्यापारियों को रोकने की कोशिश संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत देश में कहीं भी व्यापार करने की स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ है।
ग्रामीणों का आरोप: पक्ष रखने का नहीं मिला मौका
वहीं दूसरी ओर, प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का दावा है कि प्रशासन ने इस मामले में 'प्राकृतिक न्याय' के नियमों की अनदेखी की है। उनका सीधा आरोप है कि सरपंच को अपनी सफाई और पक्ष रखने का कोई उचित अवसर दिए बिना ही एकतरफा कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटा दिया गया।
जनप्रतिनिधियों ने खड़े किए प्रशासनिक फैसले पर सवाल
जनप्रतिनिधि जितेंद्र सोरी ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरपंच ने सिर्फ जनता के हित से जुड़े एक कार्यक्रम की सूचना प्रशासन तक पहुंचाने के लिए सील और दस्तखत का इस्तेमाल किया था। इसे पद का दुरुपयोग मान लेना बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है, इसलिए इस पूरे प्रकरण की दोबारा से निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
मांग पूरी न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रशासन के सामने यह मांग रखी है कि या तो बर्खास्तगी के इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए या फिर पूरे मामले की किसी उच्च स्तरीय टीम से जांच कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि अगर उन्हें

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