भीलवाड़ा:भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) मामलों की विशेष अदालत ने रिश्वतखोरी के खिलाफ एक बड़ा और कड़ा संदेश देते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने पुलिस महकमे की छवि धूमिल करने वाले एक पूर्व पुलिस अधिकारी को कानून के दायरे में लाते हुए सलाखों के पीछे भेजने का आदेश दिया है। इस निर्णय से सरकारी विभागों में पद का दुरुपयोग करने वाले और अवैध वसूली में लिप्त रहने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को कड़ा सबक मिला है कि कानून की नजर से बचना मुमकिन नहीं है।
बारह साल पुराने रिश्वत कांड में एसीबी कोर्ट का कड़ा फैसला
यह पूरा मामला करीब एक दशक से भी अधिक यानी बारह साल पुराना है, जिस पर गहन सुनवाई के बाद आखिरकार न्याय हुआ है। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया, गवाहों के बयानों और एसीबी टीम द्वारा कोर्ट में पेश किए गए पुख्ता वैज्ञानिक व दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने मामले को बेहद गंभीर माना। दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि लोक सेवक का इस तरह रिश्वत लेना समाज और कानून दोनों के साथ खिलवाड़ है।
जहाजपुर थाने में तैनाती के दौरान की थी अनुचित मांग
सजा पाने वाले आरोपी की पहचान कालू राम कहार के रूप में हुई है, जो शाहपुरा के कलिंजरी गेट का रहने वाला है। वह तत्कालीन समय में जहाजपुर थाने में सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) के पद पर कार्यरत था। पद पर रहते हुए उसने एक मामले में मदद करने के एवज में परिवादी से अनुचित लाभ और रिश्वत की मांग की थी, जिसके बाद एसीबी की टीम ने जाल बिछाकर पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया था और आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
कठोर कारावास के साथ अदालत ने लगाया आर्थिक जुर्माना
एसीबी मामलों की विशेष अदालत ने आरोपी कालू राम कहार को भ्रष्टाचार का दोषी पाते हुए चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषी पर पंद्रह हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। यदि दोषी इस जुर्माने की राशि को जमा करने में असमर्थ रहता है, तो उसे नियमानुसार अतिरिक्त अवधि के लिए जेल में कटना होगा। इस फैसले के बाद पुलिस बल द्वारा आरोपी को तुरंत हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।

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