6 साल के भागवत ब्रह्मचारी का कमाल, बड़े-बड़े नेता भी हैं इनके प्रशंसक

नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय राजधानी में देश के सबसे कम उम्र के आध्यात्मिक उपदेशक और टेडएक्स (TEDx) वक्ता भागवत दास ब्रह्मचारी से खास मुलाकात की। लगभग दो दिन पहले हुई इस भेंट के दौरान दोनों ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधारोपण किया। इस दौरान छह वर्षीय नन्हे बालक ने केंद्रीय मंत्री से कई दिलचस्प सवाल पूछे, जिसका उन्होंने सहजता से जवाब दिया। बातचीत के सिलसिले में दोनों ने एक-दूसरे को बेहद प्रभावशाली और धाराप्रवाह तरीके से संस्कृत के श्लोक भी सुनाए। शिवराज सिंह चौहान ने इस मुलाकात की तस्वीरें और विवरण अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (ट्विटर) पर साझा करते हुए इस नन्हे बालक के भीतर छुपे अध्यात्म और पर्यावरण के प्रति उसके जज्बे की खुलकर तारीफ की।

केंद्रीय मंत्री ने अपने सोशल मीडिया संदेश में लिखा कि उनके प्रतिदिन पौधा लगाने के संकल्प के तहत आज नई दिल्ली में पौधारोपण कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें बाल आध्यात्मिक वक्ता भागवत दास ब्रह्मचारी ने भी सहभागिता की। उन्होंने जोर देकर कहा कि पेड़-पौधे हमारी धरती के साथ-साथ मानव जीवन को खुशहाल और समृद्ध बनाते हैं, इसलिए सभी को पौधारोपण कर पृथ्वी को सुंदर और हरा-भरा बनाने में अपना योगदान देना चाहिए। आइए जानते हैं कि महज छह साल की उम्र में बड़े-बड़े दिग्गजों को प्रभावित करने वाले भागवत दास ब्रह्मचारी आखिर कौन हैं।

श्लोकों के अनूठे पाठ से बनाई देश-दुनिया में पहचान

भागवत दास ब्रह्मचारी मुख्य रूप से श्रीमद्भगवद्गीता के कठिन श्लोकों को बिना रुके बेहद धाराप्रवाह तरीके से सुनाने के लिए जाने जाते हैं। इतनी छोटी उम्र में वह बड़े-बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक मंचों पर प्रवचन देते हैं। उनकी इसी विलक्षण प्रतिभा के कारण उन्हें भारत के सबसे युवा TEDx स्पीकर होने का गौरव प्राप्त है, साथ ही उनका नाम कई वैश्विक रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हो चुका है। सोशल मीडिया पर उनके लाखों प्रशंसक हैं और वह देश ही नहीं बल्कि सात समंदर पार विदेशों में भी अपनी आध्यात्मिक वक्तव्य कला का लोहा मनवा चुके हैं।

आध्यात्मिक मूल्यों से सराबोर है पूरा परिवार

अगर उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें, तो मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भागवत दास के पिता का नाम अकाम भक्ति दास और माता का नाम पूज्या साची देवी है। उनका एक छोटा भाई भी है जिसका नाम हरिअंश दास है। सिर्फ माता-पिता ही नहीं, बल्कि उनके दादा ओमकार हरि दास और दादी परम मोहिनी राधा दासी भी धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए जानी जाने वाली 'गिव' (GIVE) संस्था से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। पूरे परिवार में भक्ति और सेवा का माहौल होने के कारण बच्चों में भी बचपन से ही यह संस्कार दिखाई दे रहे हैं।

कांधे पर बस्ता उठाने के बजाय चुना भक्ति का मार्ग

मूल रूप से भगवान श्रीकृष्ण की पावन क्रीड़ास्थली मथुरा के गोवर्धन में रहने वाले भागवत दास को इतनी कम उम्र में ही गीता के सैकड़ों श्लोक कंठस्थ हैं। आम बच्चों की तरह स्कूल जाने के बजाय उन्हें भगवद्गीता के ज्ञान को आत्मसात करना और श्लोकों को याद करना कहीं ज्यादा पसंद है। वह अपनी हर चर्चा और मुलाकात में लोगों को हमेशा भगवान श्रीकृष्ण के नाम का जाप करने तथा अपने जीवन में नैतिक व अच्छे कर्म करने का अनमोल संदेश देते हैं।