कोटा। राजस्थान में अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का आंदोलन एक बार फिर पूरी तरह से उग्र हो गया है। अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के आह्वान पर भारी संख्या में जुटी महिला कर्मचारियों ने मिनी सचिवालय परिसर में पहुंचकर अपनी आवाज बुलंद की। अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलित इन महिलाओं ने तीन घंटे से भी अधिक समय तक सचिवालय के बाहर डेरा डाले रखा और अंत में मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द समस्याओं का समाधान निकालने की गुहार लगाई।
मिनी सचिवालय पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन और अनोखा विरोध
जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर सचिवालय पहुंचीं, तब जिला कलेक्टर मुख्यमंत्री के साथ एक महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में व्यस्त थे। ऐसे में महिला कर्मचारियों ने प्रशासन के सामने बेहद अनोखे तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने धरना स्थल पर ही सामूहिक रूप से लोकगीत और भजन गाना शुरू कर दिया, जिसने वहां मौजूद सभी अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। शहर के प्रमुख मार्गों से रैली निकालते हुए सचिवालय पहुंचीं इन कार्यकर्ताओं ने साफ किया कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।
लंबे समय से लंबित मांगों और केवल आश्वासनों से बढ़ा आक्रोश
संघ की जिलाध्यक्ष मंजू कारपेंटर ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष प्रकट करते हुए बताया कि पूर्व में तय रणनीति के अनुसार एक जुलाई से पूरे प्रदेश में कार्य बहिष्कार किया गया था, जिसके बाद सात जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल और तालाबंदी शुरू की गई है। महिला कर्मचारियों का आरोप है कि महिला एवं बाल विकास विभाग और राज्य सरकार द्वारा पूर्व में कई बार उन्हें केवल खोखले आश्वासन दिए गए, लेकिन धरातल पर किसी भी मांग को पूरा करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बार-बार समाधान का भरोसा मिलने के बाद भी आधिकारिक आदेश जारी नहीं होने से प्रदेशभर के कर्मचारियों में नाराजगी पनप रही है।
सैनिटरी नैपकिन के ऑनलाइन काम का विरोध और ग्रेच्युटी आदेश की मांग
आंदोलनकारियों ने अपनी तकनीकी और वित्तीय समस्याओं को रेखांकित करते हुए मांग की है कि सैनिटरी नैपकिन के वितरण से जुड़े ऑनलाइन कार्य को तुरंत प्रभाव से बंद कर इसे पूरी तरह ऑफलाइन माध्यम से संचालित किया जाए। उनका तर्क है कि यह काम मूल रूप से महिला अधिकारिता और चिकित्सा विभाग का है, इसलिए इसे उन्हीं विभागों के कर्मचारियों को सौंपा जाना चाहिए और इसके बदले मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान सुनिश्चित हो। इसके साथ ही उन्होंने बजट घोषणा का हवाला देते हुए मांग की है कि सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ देने के आदेश बिना किसी देरी के तुरंत जारी किए जाएं ताकि बुजुर्ग कर्मचारियों को राहत मिल सके।
भवन किराए के भुगतान में विसंगति और जेब से पैसे भरने की मजबूरी
ज्ञापन में आंगनबाड़ी केंद्रों के किराए को लेकर चल रही विसंगतियों पर भी गहरी चिंता जताई गई है। वर्तमान में सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महज 200 रुपये और शहरी क्षेत्रों के लिए 750 रुपये प्रति माह का किराया दिया जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक यह राशि एक हजार से लेकर चार हजार रुपये तक होनी चाहिए। इस विसंगति के कारण कई कार्यकर्ताओं को मानकों के अनुसार बेहतर भवन लेने के लिए अपनी जेब से अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं और ऊपर से विभाग द्वारा पिछले एक साल से भवन किराए का भुगतान भी अटका कर रखा गया है। कार्यकर्ताओं ने इन सभी बकाया राशियों, सामुदायिक गतिविधियों के खर्चों और केंद्र व राज्य सरकार से जुड़े तमाम लंबित मुद्दों का अविलंब निपटारा करने की मांग की है।

More Stories
मोबाइल चैट के आधार पर बढ़ी जांच, सूरत ध्वस्तीकरण केस में हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
झारखंड को नई सौगात, देवघर-गुवाहाटी के बीच शुरू होगी सीधी हवाई सेवा
छोटे जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी छलांग, हाई रिस्क मातृ मामलों का सफल प्रबंधन