मुंबई। महाराष्ट्र के सियासी समर में चल रही उठापटक के बीच एक और बहुत बड़े राजनीतिक बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में जाने के बाद, अब राज्य के राजनीतिक गलियारों में शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। चर्चा है कि शरद पवार का यह गुट सत्ताधारी महायुति गठबंधन का हिस्सा बन सकता है। इन अटकलों को तब और हवा मिली जब राकांपा (शरदचंद्र पवार) के दिग्गज नेता व विधायक जयंत पाटिल और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद विनोद तावड़े के बीच देश की आर्थिक राजधानी के एक पांच सितारा होटल में गोपनीय मुलाकात हुई।
गठबंधन में शामिल होने की शर्तों और सत्ता में हिस्सेदारी पर मंथन!
सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल बैठक के दौरान इस बात पर गहन चर्चा हुई कि यदि शरद पवार की पार्टी महायुति सरकार में शामिल होती है, तो मंत्रिमंडल और सत्ता के ढांचे में उसकी क्या भूमिका होगी और उन्हें कौन से महत्वपूर्ण विभाग सौंपे जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा नेता से बातचीत के बाद जयंत पाटिल ने इस पूरे फीडबैक को अपनी पार्टी के एक बेहद शीर्ष नेता के साथ भी साझा किया है। हालांकि, चौतरफा उठते सवालों के बीच जयंत पाटिल ने विनोद तावड़े से अपनी इस मुलाकात को स्वीकार तो किया, लेकिन उन्होंने इसे महज एक शिष्टाचार भेंट बताते हुए किसी भी तरह के राजनैतिक सौदेबाजी या समझौते की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया।
मुलाकातों को राजनीतिक चश्मे से देखना ठीक नहीं: सुप्रिया सुले
इस पूरे घटनाक्रम और पाटिल-तावड़े की बैठक पर राकांपा (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। सुले ने कहा कि उन्हें इस विशेष मुलाकात के बारे में पहले से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं थी। उन्होंने राजनीतिक अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश करते हुए कहा कि संसदीय समितियों के काम के सिलसिले में अलग-अलग विचारधाराओं के नेताओं का आपस में मिलना-जुलना एक सामान्य प्रक्रिया है। सुप्रिया सुले ने खुलासा किया कि खुद उनकी भी पिछले एक महीने के भीतर विनोद तावड़े और भाजपा के कई अन्य कद्दावर नेताओं से अनेक बार मुलाकातें हुई हैं, इसलिए हर मुलाकात को राजनीतिक नफा-नुकसान से जोड़कर देखना कतई उचित नहीं है।
छह दशकों की वैचारिक लड़ाई, महायुति में जाने का सवाल ही नहीं: रोहित पवार
दूसरी तरफ, पार्टी के युवा चेहरे और विधायक रोहित पवार ने महायुति गठबंधन में शामिल होने की इन तमाम खबरों को महज एक सुनियोजित अफवाह करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर इस प्रकार का कोई भी प्रस्ताव या चर्चा दूर-दूर तक अस्तित्व में नहीं है। रोहित पवार ने वैचारिक रुख साफ करते हुए कहा कि उनका संगठन पिछले लगभग छह दशकों से भाजपा की नीतियों और उनकी विचारधारा के खिलाफ पुरजोर लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में महायुति सरकार के साथ जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता और इन दावों में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है।

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