चीनी के दामों में फिर उछाल, बढ़ेगा घर का बजट या मिलेगी राहत?

नई दिल्ली। देश में इस वर्ष मानसून की बेरुखी और कम बारिश के पूर्वानुमान के बीच अब आम जनता की जेब पर महंगाई का बोझ बढ़ना शुरू हो गया है। वैश्विक मौसम प्रणाली में आए अलनीनो के कड़े प्रभाव के कारण इस साल सामान्य से काफी कम वर्षा होने की आशंका जताई गई थी, जिसका सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ता दिख रहा है। कम बारिश के इस शुरुआती अनुमान ने गन्ने की खड़ी फसलों की पैदावार को बुरी तरह प्रभावित करने का डर पैदा कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप जून के महीने में ही देश भर के बाजारों में चीनी की कीमतों में अचानक जोरदार तेजी दर्ज की जाने लगी है।

गन्ने की कमजोर पैदावार की आशंका से चीनी बाजार में आया उछाल

पर्यावरण में आए बदलावों और पानी की कमी के चलते देश के प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्रों में गन्ने की बुवाई और उसकी बढ़त पर प्रतिकूल असर पड़ने की रिपोर्ट आ रही है। बाजार के जानकारों और कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि आने वाले समय में मानसूनी बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो चीनी के कुल उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। इसी संभावित किल्लत को भांपते हुए थोक व्यापारियों और मिल मालिकों ने अभी से स्टॉक को रोकना और कीमतों को बढ़ाना शुरू कर दिया है, जिससे आने वाले त्योहारी सीजन में मीठे का स्वाद और कड़वा होने के आसार बन गए हैं।

महाराष्ट्र की चीनी मिलों में कीमतों में दर्ज की गई भारी बढ़ोतरी

घरेलू स्तर पर चीनी उत्पादन के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में प्राकृतिक चीनी का सबसे बड़ा योगदान देने वाला राज्य महाराष्ट्र इस समय कीमतों की इस तेजी का मुख्य केंद्र बना हुआ है। चीनी उद्योग से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र की विभिन्न मिलों से निकलने वाली चीनी की थोक कीमत करीब 38.5 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से छलांग लगाकर अब लगभग 41.5 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। मिल स्तर पर हुई इस तीन रुपये प्रति किलो की सीधी बढ़ोतरी ने खुदरा बाजार के समीकरणों को भी पूरी तरह से बदल दिया है।

कोल्हापुर के थोक बाजार में सात फीसदी से अधिक उछले दाम

चीनी व्यापार के प्रमुख और ऐतिहासिक केंद्र माने जाने वाले कोल्हापुर मार्केट में भी इस महंगाई का सबसे तगड़ा असर देखने को मिला है। ताजा व्यापारिक रिपोर्ट के अनुसार कोल्हापुर के थोक बाजार में चीनी के दामों में अचानक सात फीसदी से ज्यादा का भारी उछाल दर्ज किया गया है। इस तेजी के बाद वहां चीनी की थोक कीमत बढ़कर 4,120 रुपये प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंची है, जिसका सीधा असर उत्तर और पश्चिमी भारत के अन्य राज्यों के थोक और खुदरा बाजारों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।

आने वाले दिनों में खुदरा उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

थोक और मिल स्तर पर चीनी के दामों में आई इस अचानक तेजी का खामियाजा अब सीधे तौर पर देश के आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा। स्थानीय किराना दुकानों और खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतें आने वाले हफ्तों में और अधिक बढ़ सकती हैं, जिससे आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। इसके साथ ही चीनी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने वाले अन्य उद्योगों जैसे कन्फेक्शनरी, कोल्ड ड्रिंक्स और मिठाई निर्माताओं की लागत बढ़ने से इनसे जुड़े अन्य खाद्य उत्पाद भी महंगे होने की पूरी संभावना बन गई है।