बारूइपुर: पश्चिम बंगाल के बारूइपुर में 11 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी और उसकी हत्या के मामले में पुलिस ने बेहद सख्त और बड़ी कार्रवाई की है। मामले के मुख्य संदिग्धों में से एक आरोपी बीती रात पुलिस एनकाउंटर (मुठभेड़) में मारा गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जांच टीम आरोपी को घटना से जुड़े सबूतों की तलाश के लिए एक सुनसान इलाके में लेकर गई थी, जहाँ उसने पुलिस कस्टडी से भागने का प्रयास किया और टीम पर हमला बोल दिया। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में आरोपी गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दिया त्वरित न्याय का भरोसा
इस खौफनाक वारदात के बाद से ही स्थानीय जनता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। बिगड़ते हालातों को देखते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद स्थिति का जायजा लेने बारूइपुर पहुंचे। उन्होंने पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय में पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना देते हुए निष्पक्ष व त्वरित न्याय का पक्का भरोसा दिलाया। इस दौरान राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजी) सिद्धनाथ गुप्ता भी उनके साथ मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने पुलिस के आला अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कर साफ निर्देश दिए कि दोषियों के खिलाफ ऐसी कड़ी कार्रवाई की जाए जो भविष्य के लिए मिसाल बने।
सबूत जुटाने गई पुलिस टीम पर आरोपी ने किया हमला
इस मामले में तत्परता दिखाते हुए पुलिस ने पहले आनंद सरदार, प्रभास मंडल और दिवाकर सरदार नाम के तीन आरोपियों को दबोचा था। इसके बाद बीती रात जब पुलिस की टीम एक आरोपी को लेकर साक्ष्य जुटाने के लिए बारूइपुर के सुनसान इलाके में पहुंची, तो उसने भागने की नीयत से पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। जवाबी कार्रवाई और आत्मरक्षा में पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिससे आरोपी ढेर हो गया।
लापता बच्ची का शव मिलने पर भड़का था जनाक्रोश
बारूइपुर में शनिवार को लापता हुई इस मासूम बच्ची का शव अगले दिन रविवार सुबह रेलवे लाइन के पास एक तालाब से बरामद किया गया था। इस खबर के फैलते ही पूरे इलाके में तनाव फैल गया और लोग हिंसक प्रदर्शन करने सड़कों पर उतर आए। इस भारी गुस्से के बीच उत्तेजित भीड़ ने एक अन्य युवक की पीट-पीटकर हत्या (मॉब लिंचिंग) कर दी, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति और नाजुक हो गई। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार के साथ-साथ इस मॉब लिंचिंग का शिकार हुए युवक के परिजनों से भी मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया।
पुलिस की लापरवाही के आरोपों की भी होगी जांच
शुरुआती चरण में इस पूरी घटना को लेकर स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे थे। मृतका के परिजनों और ग्रामीणों का आरोप था कि बच्ची की गुमशुदगी की फौरन शिकायत करने के बाद भी पुलिस ने समय रहते खोजबीन शुरू नहीं की और मौके पर भी देरी से पहुंची। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए डीजी सिद्धनाथ गुप्ता ने खुद घटनास्थल और तालाब का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट किया है कि तीन गिरफ्तारियों और एक आरोपी के एनकाउंटर के बावजूद, शुरुआत में पुलिस की तरफ से हुई कथित लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

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