गांधीनगर। गुजरात सरकार ने राज्य के किसानों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए बिजली पारेषण (ट्रांसमिशन) लाइनों और टावरों की स्थापना के लिए अधिग्रहित होने वाली कृषि भूमि के मुआवजे में बंपर बढ़ोतरी की है। नए नियमों के तहत अब काश्तकारों को उनकी जमीन के वर्तमान बाजार मूल्य का दोगुना भुगतान किया जाएगा, जिससे उन्हें अपनी संपत्ति का उचित दाम मिल सकेगा। शुक्रवार को जारी एक शासकीय विज्ञप्ति में इस कल्याणकारी निर्णय की घोषणा की गई, जिससे पिछले लंबे समय से पुरानी मुआवजा नीति का विरोध कर रहे राज्यभर के किसानों को बहुत बड़ी राहत मिली है।
नई नीति के प्रावधान और एकमुश्त भुगतान
इस संशोधित नीति के जरिए मुआवजा व्यवस्था में कई क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं। अब मुआवजे का आकलन जंत्री दरों (सरकारी मूल्यांकन सूची) के स्थान पर सीधे जमीन की मौजूदा मार्केट वैल्यू के आधार पर करके उसे दोगुना दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, टावर निर्माण के घेरे में आने वाली भूमि की गणना का दायरा भी बढ़ा दिया गया है, जिसके तहत टावर के वास्तविक आधार क्षेत्र के चारों तरफ एक-एक मीटर अतिरिक्त जमीन जोड़कर मुआवजा तय होगा। किसानों की सुविधा के लिए पूर्व की तीन किस्तों वाली भुगतान प्रणाली को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है; अब परियोजना का कार्य आरंभ होने से पहले ही शत-प्रतिशत मुआवजे की राशि एकमुश्त (एक बार में) दे दी जाएगी।
पारदर्शिता के लिए बाजार दर समिति का गठन
जमीन की वास्तविक और निष्पक्ष कीमतों का आकलन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक विशेष बाजार दर समिति (Market Rate Committee – MRC) का गठन किया जाएगा। इस समिति में जिला कलेक्टर, प्रभावित किसानों के प्रतिनिधि, काश्तकारों द्वारा मनोनीत अधिकृत मार्केट वैल्यूअर और ट्रांसमिशन कंपनी के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। यह समिति पूरी पारदर्शिता के साथ जमीन की वर्तमान बाजार दर निर्धारित करेगी, जिससे राइट ऑफ वे (RoW) कॉरिडोर के तहत दिए जाने वाले मुआवजे में किसी भी प्रकार की विसंगति की गुंजाइश नहीं रहेगी।
विभिन्न क्षेत्रों के लिए तय मुआवजा दरें
समिति द्वारा तय किए गए बाजार मूल्य के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों के लिए मुआवजे का प्रतिशत भी निर्धारित कर दिया गया है। इसके अंतर्गत ग्रामीण अंचलों में आने वाली जमीनों के लिए किसानों को आकलित बाजार मूल्य का 30 फीसदी मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, नगरपालिका क्षेत्रों में आने वाली कृषि भूमि के लिए यह दर 45 प्रतिशत तय की गई है, जबकि नगर निगम (महानगरपालिका) की सीमाओं में शामिल जमीनों के लिए प्रभावित भू-स्वामियों को अनुमानित बाजार मूल्य का 60 प्रतिशत मुआवजा प्रदान किया जाएगा।

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